खजूर की खेती पर संकट! टिश्यूकल्चर पौधों की कमी बनी बड़ी बाधा
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश में खजूर की खेती को विस्तार नहीं मिल पा रहा है। जबकि, सरकार किसानों को अनुदान मुहैया करवा रही है। हालात यह है कि किसान खजूर बगीचा स्थापित करना चाहते है। लेकिन, विभाग किसानो की मांग के मुताबिक टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। इससे खजूर की खेती पर स्वत: ही बे्रक लगता नजर आ रहा है। कई किसानों को पर्याप्त संख्या में पौधे नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में सरकारी स्तर पर खजूर खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों के बावजूद पौधों की कमी किसानों के सामने बड़ी बाधा बन गई है।
9 जिलों में पौधो का आवंटन
उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के नौ जिलों में कुल 11,396 टिश्यू कल्चर पौधों का आवंटन किया गया है। जिसमें श्रीगंगानगर को 1878, हनुमानगढ़ को 230 पौधे , पाली को 6057 और बाड़मेर को 3040 पौधे आवंटित किए गए हैं। इसी तरह जालौर को 713, जैसलमेर को 50, बीकानेर को 49 और झुंझुनूं में7 पौधे पौधें आवंटित हुए है। जबक, अजमेर को एक भी पौधा नहीं मिला।
टिश्यू कल्चर पर भरोसा
खजूर किसानों को पहले ऑफ टाइप पौधों के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। अब टिश्यू कल्चर पौधों को बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के लिहाज से उम्मीद की नजर से देखा जा रहा है। बरही, खलास और मेडजूल जैसी किस्मों की मांग बढ़ रही है। हालांकि शुरुआती तीन-चार साल उत्पादन नहीं मिलने और तकनीकी देखरेख की जरूरत के कारण यह लंबी अवधि का निवेश है।