फर्टिलाइजर फ्रेमवर्क आज से 5 जिलों में, जल्द 12 जिलों में विस्तार
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। उर्वरक कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर अंकुश लगाने के लिए आज से पांच जिलों में कृषि विभाग फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल व्यवस्था लागू करने जा रहा हैं । इनमें बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू जिला शामिल है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि डिजिटल तकनीक आधारित इस व्यवस्था जल्द ही 12 जिलों मेँ विस्तार किया जायेगा । गोयल ने बताया कि सिरोही और राजसमंद में फ्रेमवर्क के तहत अब तक लगभग 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया जा चुका है। नई व्यवस्था से किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद किसान को 48 घंटे की वैधता वाला टोकन जारी किया जायेगा । किसान इस टोकन के आधार पर अपने नजदीकी अधिकृत उर्वरक विक्रेता से उर्वरक प्राप्त करता है।
675 करोड़ की प्रोत्साहन राशि
गोयल ने बताया कि सिरोही और राजसमन्द में फ्रेमवर्क लागू करने पर 175 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है । वहीं पूरे प्रदेश में लागू करने पर 675 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त होगी। कृषि विभाग एलपीजी गैस की तरह किसानों को उर्वरक की होम डिलीवरी देने पर गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस संबंध में सहकारिता विभाग से प्रारम्भिक चरण की बैठकें हो चुकी है।
उर्वरक के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से किसान को उसकी आवश्यकता के अनुरूप बुकिंग की सुविधा मिलने के बाद नजदीकी अधिकृत विक्रेता से उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों को उर्वरक के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक जाने तथा लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी से राहत मिल रही है। तकनीक आधारित इस व्यवस्था से किसानों को यह भी पता रहता है कि उन्हें उर्वरक कहां और किस प्रक्रिया के तहत प्राप्त करना है। इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक नजर
फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से उर्वरक की वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक का पता आसानी से चल जाएगा । डिजिटल निगरानी के जरिए मांग, आपूर्ति और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है।