मंगला पशु बीमा योजना फिर फिसड्डी, लक्ष्य से लाखों पशु पीछे
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना दूसरे चरण में भी तय लक्ष्य से पिछड़ती नजर आ रही है। विशेषकर भेड़-बकरी और ऊंट को बीमित करने के मामले में। क्योंकि, पशुपालक योजना में रूचि नहीं दिखा रहे है। सूत्रों ने बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा तय लिमिट में पशुओं का बीमा किया जा रहा है। जबकि, पशुपालक के पास पशुओं की संख्या ज्यादा है। शायद यही कारण है कि 28 लाख 82 हजार 252 पशुओं के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 20 लाख 17 हजार 827 पशुओं का ही पंजीकरण हुआ है।
बड़ी समस्या भेड़ और ऊंट पालकों की
योजना के तहत एक पशुपालक अधिकतम 10 भेड़ों का ही बीमा करवा सकता है। जबकि, भेड़ पालन करने वाले पशुपालकों के पास आमतौर पर 100 से 300 तक भेड़ों के रेवड़ होते हैं। ऐसे में महज 10 भेड़ों का बीमा करवाने में पशुपालक ज्यादा रुचि नहीं दिखाते। यही वजह है कि 8 लाख 62 हजार 578 भेड़ों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 2 लाख 94 हजार 16 का ही पंजीकरण हुआ है। इसी तरह एक ऊंट की बीमा राशि 40 हजार रुपए तय है और अधिकतम 10 ऊंटों का बीमा होने पर एक पशुपालक को 4 लाख रुपए तक का बीमा कवर मिलता है। लेकिन ऊंट पालन सीमित पशुपालकों की ओर से किए जाने और 10 पशुओं की सीमा के कारण लक्ष्य के मुकाबले अब तक महज 38 हजार 958 ऊंटों का पंजीकरण हुआ है। 1 लाख 92 हजार 134 के लक्ष्य के मुकाबले यह करीब 20.27 फ ीसदी है।
स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बाद भी बीमा नहीं
सूत्रों ने बताया कि पशु चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बावजूद कई मामलों में बीमा कंपनी की ओर से बीमा नहीं किया जा रहा। ऐसे में पंजीकरण और वास्तविक बीमा की संख्या में भी अंतर सामने आ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 40,47,782 पशुओं का पंजीकरण पशुपालन विभाग की ओर से किया गया। लेकिन बीमा कम्पनी ने मात्र 24,67,911 पशुओं की बीमा पॉलीसी जारी की। गौरतलब है कि अब भी कई पशुपालकों को पशु की मौत होने के बाद भी उन्हें क्लेम का भुगतान नहीं मिल पाया है।