3 एकड़ में प्राकृतिक खेती से 5-6 लाख कमाई, ऐसे बदली जिंदगी

नई दिल्ली 24-Aug-2026 04:18 PM

3 एकड़ में प्राकृतिक खेती से 5-6 लाख कमाई, ऐसे बदली जिंदगी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बिचून, जयपुर। बड़ी प्रचलित कहावत है गुरूजी गुड खाएं, बच्चों को परहेज बताएं...। मामला समझ गए होंगे। किसान मोतीलाल कुमावत के प्राकृतिक के ब्रांड एम्बेसडर बनने की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। किसान मोतीलाल कुमावत का कहना है कि पहले परिवार के लिए जहरमुक्त उपजाना शुरू किया। कृषि विभाग को मेरा काम पसंद आया तो मास्टर ट्रेनर बना दिया। उन्होंने हलधर टाइम्स को बताया कि 8 साल से प्राकृतिक खेती कर रहा हॅू। प्राकृतिक की शुरूआत थोड़े से क्षेत्रफल के साथ हुई। पहले ठेेकेदारी का काम करता था। लेकिन, अब खेतों में प्रकृति और परिवार की स्वास्थ्य रक्षा के लिए पसीना बहा रहा हॅू। बता दें किसान मोतीलाल के पास 3 एकड़ जमीन है और 10वीं पास करने के खेती और ठेकेदारी का काम करते आए है। उन्होंने बताया कि पहले खेती पर ज्यादा ध्यान नहीं था। लेकिन, कोविड-19 के संक्रमण के दौरान काफी कुछ जानने सीखने को मिला। यही से मैने जहरमुक्त खेती का प्रण किया। शुरूआत परिवार की आवश्यकता पूर्ति से हुई। उन्होंने बताया कि जब जमीन है, परिवार है तो उनके लिए रसायनयुक्त खाद्य क्यों पैदा करें। इस तरह प्राकृतिक खेती की शुरूआत हुई। उन्होंने बताया कि उर्वरक और रसायन की बचत हुई तो इस दिशा में आगे बढ़ता गया। क्योंकि, रोटी और सब्जी का स्वाद बिल्कुल बदल चुका था। इस तरह खेती करते हुए करीब 8 साल हो चुके है।

सब्जी फसलों पर ज्यादा फोकस

उन्होंने बताया कि जमीन कम होने के चलते रबी-खरीफ खाद्यान्न फसलों पर मेरा ज्यादा जोर नहीं है। परिवार की रहगुजर चलाने के लिए सब्जी फ सलों का उत्पादन ज्यादा लेता हॅॅू। सिंचाई के लिए मेरे पास कुआ और ट्यूबवैल है। सब्जी फसलों में टमाटर, गोभी, तरबूज, पालक, गाजर सहित अन्य सब्जी फसलों का उत्पादन लेता हॅू। इनकी बिक्री खेत से ही हो जाती है। क्योंकि, अब लोगों का विश्वास जम चुका है। जबकि, खाद्यान्न फसल में गेहूं, बाजरा और मूग का उत्पादन लेता हॅॅू। इन फसलों से सालाना 5-6 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।

गौपालन से राह हुई आसान

उन्होंने बताया कि गौ पालन से प्राकृतिक खेती की राह आसान हुई है। क्योंकि, बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत सहित अन्य जैव खाद और कीटनाशी तैयार करने के लिए गोबर और गौमूत्र की जरूरत होती है। वर्तमान में मेरे पास 4 गाय है। इनसे प्रतिदिन 30 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। एक समय का दुग्ध डेयरी को 55 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर रहा हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है।

 


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