खेती छोड़ अपनाया पशुपालक मासिक कमाई 50 हजार

नई दिल्ली 20-Apr-2026 04:53 PM

खेती छोड़ अपनाया पशुपालक मासिक कमाई 50 हजार

(सभी तस्वीरें- हलधर)

घोड़ाखेड़ा, चित्तौडग़ढ़। पशुपालन से जमीन की सालाना कमाई को पीछे छोड़ते हुए किसान हैं प्रकाश चंद्र पाटीदार। जिनका कहना है कि साल भर खेती करके जितनी कमाई होती थी। वो अब पशुपालन से दो माह में मिल रही है। गौरतलब है कि किसान प्रकाश चंद्र पशुपालन से मासिक 50 हजार रूपए का शुद्ध मुनाफा कमा रहे है। वहीं, $कृषि गत आय बढौत्तरी के लिए फसल चक्र में बदलाव कर चुके है। इससे भी 50-60 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी है। किसान प्रकाश चंद्र ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 6 बीघा जमीन है। 12वीं पास करने के बाद से खेती कर रहा हूँ। लेकिन कोई खास मुनाफा खेती में मुझे नजर नहीं आया। यही कारण रहा कि दशक पूर्व खेती से इतर कमाई के लिए पशुपालन पर भरोसा किया और सफल भी रहा। उन्होंने बताया कि 6 बीघा जमीन से सालभर में लाख रुपये की आमदनी मिलती थी। अब इतनी आमदनी पशुपालन से दो महीने में मिल रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 के दौरान 4 गायों के साथ पशुपालन की ओर कदम बढ़ाया। दूग्ध को सांवलिया जी में बिक्री करने लगा। इससे हर महीने अच्छी आमदनी मिलना शुरू हुई तो बचत को उन्नत पशुओ की खरीद में निवेश करना शुरू किया। इसी का परिणाम है कि पशुओं के साथ-साथ आमदनी का आंकड़ा छलांग मारता नजर आ रहा है। पशुधन में मेरे पास 7 गाय और सात भैंस हैं। प्रतिदिन 80-90 लीटर दूध का उत्पादन मिल रहा है। 

ऐसे बढ़ी कमाई

उन्होंने बताया कि पशुपालन की शुरुआत देसी तरीके से हुई। जैसे-जैसे बचत बढ़ी, पशु सुविधाओं का विस्तार करता रहा। इसी का परिणाम है कि पशु शेड और चारा गोदाम सहित सहायक मशीन मेरे पास है। उन्होने बताया कि प्रतिदिन 80 से 90 लीटर दूध का उत्पादन मिल रहा है। अधिकांश दुग्ध की आपूर्ति उपभोक्ताओं को 60-70 रूपए प्रति लीटर की दर से कर रहा हॅू। वहीं, कुछ दुग्ध डेयरी को 50 रूपए प्रति लीटर की दर से कर रहा हॅू। इससे सारा खर्च निकालकर मासिक 50 हजार रुपये की बचत मिल रही है। 

बदला फसल चक्र

उन्होंने बताया कि पहले परंपरागत फसलों का उत्पादन लेता रहा। लेकिन, अब फसल चक्र में बदलाव कर चुका हॅू। परम्परागत की जगह प्याज, लहुसन, मिर्च, भिंड़ी, टमाटर जैसी सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। इस 3-4 बिस्वा जमीन से 50-60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ मिलने लगा है। उन्होनें बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है। वहीं, पशु अपशिष्ट के उपयोग से देसी खाद तैयार करके उपयोग कर रहा हूँ। 

डॉ. आरएल सोलंकी, केवीके, चित्तौडग़ढ


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