4 हजार से पहुंचे 16 हजार तक, कमाई बढ़कर 40 लाख

नई दिल्ली 22-Apr-2026 12:22 PM

4 हजार से पहुंचे 16 हजार तक, कमाई बढ़कर 40 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बसेड़ी, जयपुर। 4 को चौगुना करने हौंसला रखने वाले किसान है तेजपाल दुसाद, जिन्होंने उच्च शिक्षित होने के बावजूद नौकरी की जगह खेती को चुना और कम पानी में बेहत्तर आय का फलसफा लिख दिया। बता दें कि किसान तेजपाल 16 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बरसाती पानी के सहारे रंगीन शिमला मिर्च और खीरे का उत्पादन ले रहे है। साथ ही, ओपन फील्ड में सब्जी फसलों का उत्पादन। उनका कहना है कि खेतों मेें परम्परागत फसल का उत्पादन अब पूरी तरह से बंद कर चुका हॅू। उन्होंने बताया कि एक फसल से 5 लाख रूपए औसत बचत मिल जाती है। ऐसे में आय का अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है। किसान तेजपाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 13 बीघा जमीन है। लेकिन, पानी की कमी के चलते परम्परागत में भी कम पानी चाहने वाली फसलों का उत्पादन लेना पड़ता था। इस कारण परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य रही। एमएससी करने के बाद मैने दूसरों के यहां नौकरी करने के बजाए खेती में ही कुछ नया करने का मन बनाया। इसी का परिणाम है कि अब परिवार की आवश्यकता पूर्ति के लिए गेहंू की खरीद दूसरे किसानों से कर रहा हॅू। उन्होंने बताया कि कृषिगत आय बढौत्तरी के लिए वर्ष 2019-20 में सरकार की अनुदान सहायता का लाभ लेकर 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉली हाउस स्थापित करवाया। साथ ही, सिंचाई समस्या से निजात पाने के लिए फार्मपौंड भी खुदवाया। परिणाम रहा कि पहले ही साल मेें खीरे की फसल से लाखों रूपए की आय मिली। इससे उत्साह बढ़ा। इसके बाद से कभी पीछे मुडक़र देखने की स्थिति नहीं आई। 

16 होने की कहानी

उन्होंने बताया कि खीरे की फसल से अच्छी आमदनी होने के चलते हौंसला बढ़ता रहा। साथ ही, मुनाफे का निवेश संरक्षित खेती का दायरा बढाने में करना शुरू किया। इसी का परिणााम है कि 16 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र संरक्षित के दायरे में आ चुका हैं। खेत में 4 पॉली हाउस खड़े हुए है। उन्होंने बताया कि एक फसल से औसत 5 लाख रूपए का शुद्ध लाभ मिल जाता है। साल में खीरे की दो फसल का उत्पादन लेता हॅू। वहीं, रंगीन शिमला मिर्च से भी अच्छा लाभ मिल रहा है। 

पहले चार लाख

उन्होंने बताया कि पहले 13 बीघा जमीन से सालाना तीन से चार लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। लेकिन, अब इससे ज्यादा आमदनी तो ओपन फील्ड सब्जी फसलों के उत्पादन से मिल रही है। उन्होंने बताया कि ओपन फील्ड में स्वीटकॉर्न, प्याज, टमाटर ओर मिर्च का उत्पादन लेता हॅू। 


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कहते है कि परिवार के आर्थिक हालात ठीक नही हो तो सफलता के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। किसान औंकारमल मेघवाल के साथ भी यही हुआ है। औंकार ने बताया कि पहले खेतों से पैदावार कम मिलती थी। इससे परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल लगता था। मजबूरी में रोटी-रोटी की तलाश ने मुझे दुबई पहुंचा दिया। आठ साल में जो कमाया, यहां लौटकर खेतों में निवेश किया। इसी का परिणाम है कि अब खेतों से 10-12 लाख रूपए सालाना की आमदनी मिल रही है। गौरतलब है कि किसान औकारमल डेढ़ दशक से सब्जी फसलो की खेती कर रहे है। साथ ही, इन्होने प्रति बीघा परम्परागत फसलों का उत्पादन बढ़ाने में भी सफलता पाई है। मोबाइल 9983231901