10 लाख का सामान चोरी, जांच रिपोर्ट सामने फिर भी विश्वविद्यालय खामोश
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। आम आदमी के लिए एक रूपए का खो जाना भी मायने रखता है। लेकिन, जब बात सरकार के पैसों की हो तो आंखे मूंद ली जाती है। कुछ ऐसे ही हालात श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के बने हुए है। जांच बाद तस्वीर साफ होने और सामान चोरी की घटनाएं ऑन रिकॉर्ड होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन चुप्पी मार बैठा है। गौरतलब है कि विश्विद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय के अधीन स्टोर से करीब 10 लाख कीमत के विभिन्न सामान चोरी गए है। यह बात हम नहीं, विश्वविद्यालय के द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट कह रही है। सूत्रों ने बताया कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रबंधन को सौंप दी है। लेकिन, दोषियों के खिलाफ विश्वविद्यालय के द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है और ना ही कोई कानूनी कार्यवाही की गई है। इससे विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे है।
यह है मामला
विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय के अन्तर्गत स्टोर से लाखों रूपए के सामान चोरी होने की एक शिकायत राजभवन तक पहुंची। राजभवन ने शिकायत पर एक्शन लेते हुए प्रमुख शासन सचिव कृषि को जांच के आदेश जारी किए। लेकिन, नीचले स्तर पर मामला बिल्ली को दूध की रखवाली सौंपने जैसा हो गया। क्योंकि, शासन स्तर से विश्वविद्यालय का जांच सौंप दी गई।
चोरी ऑन रिकॉर्ड ऐसे
सरकार के आदेश पर विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक ने 3 सदस्यी फिजिकल वेरिफिकेशन कमेटी का गठन किया। कमेटी ने करीब 10 लाख रूपए का सामान ना मिलने और खुर्द-बुर्द होने की बात अपनी रिपोर्ट में लिखी है। जिसको उसी विभाग के तीन अतिरिक्त सदस्यों ने अपने हस्ताक्षर किये और स्वीकार किया की रिपोर्ट सही है। यह हाल तो तब है जब कमेटी ने कंनज्यूमर रजिस्टर का लेखा-जोखा नहीं मिलाया है। कमेटी ने माना है कि 1.58 लाख रूपए के प्रोजेक्टर का बदला गया है।
शिकायत को बताया था झूठी
गौरतलब है कि हलधर टाइम्स के पास सामान चोरी का मामला पहुंचने पर विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक ने पूरे मामले का झूठला दिया था। कहा था कि शिकायतकर्ता के खिलाफ विश्वविद्यालय जांच कर रहा है, इसलिए झूठी शिकायत की गई है। उसी निदेशक डा शैलेश गोदिका ने सामान ना मिलना स्वीकार किया है और पत्र वित्त नियंतक को भेजा गया है। अब नियमानुसार सम्बंधित कार्मिक के खिलाफ स्नढ्ढक्र दर्ज होना बनता है और सम्बंधित अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही तो बनती है। बता दें कि फिजीकल वेरीफिकेशन कमेठी की जांच रिपोर्ट हलधर टाइम्स के पास सुरक्षित है।