कोई बच्चा नहीं कहता कि मै कृषि वैज्ञानिक बनूंगा...

नई दिल्ली 26-Aug-2026 02:09 PM

कोई बच्चा नहीं कहता कि मै कृषि वैज्ञानिक बनूंगा...

(सभी तस्वीरें- हलधर)

कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का 36वां वार्षिक सम्मेलन
जयपुर । मै कई बार बच्चों से पूछता हॅू, क्या बनोगे। कोई कहता है डॉक्टर, कोई कहता है इंजीनियर। लेकिन, यह कोई नहीं कहता कि कृषि वैज्ञानिक बनूंगा, किसान और कृषि उद्यमी बनूंगा। समय बदल रहा है, खेती बदल रही है। इसलिए कृषि शिक्षा में भी बदलाव लाना होगा। यहां कि कृषि वयवस्था दुनिया की सबसे बड़ी व्यवस्था है। राज्य और आईसीएआर के कई कृषि विश्वविद्यालय है। निजी क्षेत्र कृषि विश्वविद्यालय है। ऐसे में हमें देखना होगा कि निजी कृषि विश्वविद्यालय पैसे कमाने के लिए तो नहीं खोले जा रहे है। इसके लिए रूल्स और रेगुलेशन को अपडेट करने की जरूरत है। शिक्षा और अनुसंधान के जरिए कृषि चुनौतियों को कम करना होगा। यह बात केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में आयोजित कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के 36वें वार्षिक सम्मेलन में कही। विकसित भारत ञ्च2047 के लिए कृषि उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना विषयक इस सम्मेलन में कृषि शिक्षा प्रणाली के सुधारों और प्राथमिकताओं पर मंथन किया गया।  उन्होंने विकसित भारत के लिए एक आधुनिक, सशक्त और समृद्ध कृषि क्षेत्र पर जोर दिया।  उन्होंने कृषि शिक्षा और अनुसंधान को किसानों की जरूरतों के साथ जोडऩे की आवश्यकता जताई। साथ ही, आधुनिक प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान, उद्यमिता और कृषि व्यवसाय में युवाओं को आकर्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

टिकाऊ कृषि पर जोर

कृषि राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों को टिकाऊ और प्रौद्योगिकी-संचालित कृषि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने नवाचार, उद्यमिता और उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। वहीं, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कहा, भविष्य की कृषि शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और कृषि की उभरती जरूरतों के मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में डिग्री प्रदान करने की जरूरत है।

इन मुद्दों पर हुई चर्चा

सम्मेलन के दौरान 14 ऐंजेडे के साथ-साथ एआईक्यू परामर्श, पशु चिकित्सा विज्ञान के लिए पीएचडी काउंसलिंग, हिंदी-माध्यम के छात्रों के लिए स्नातक पात्रता , जेआरएफ-एसआरएफ , मजबूत उद्योग-अकादमिक संबंधों, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप, पाठ्यक्रम में संशोधन, ट्विनिंग और संयुक्त डिग्री पाठ्यक्रमों और अकादमिक आदान-प्रदान , को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण मॉड्यूल ,कृषि खेल 2026 में कृषि विश्वविद्यालयों की भागीदारी, यूजीसी पीएचडी नियमन, 2016, एनआईआरएफ रेटिंग शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्योग और ग्रामीण जुड़ाव पर मंथन किया गया।


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