मानसून में पशुओं को परजीवियों से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

नई दिल्ली 27-Aug-2026 01:56 PM

मानसून में पशुओं को परजीवियों से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

उमस और गर्मी के कारण मक्खी, मच्छर, चीचड़ी और जूं का प्रकोप अत्यधिक बढ़ जाता है। ये न केवल पशुओं का खून चूसकर उन्हें कमजोर बनाते हैं, बल्कि थायलेरिया और अनाप्लास्मोसिस जैसी खूनी बीमारियों के वाहक भी होते हैं।

  • बाहरी परजीवियों का नियंत्रण: पशुशाला की दीवारों की दरारों और कोनों में चीचड़ी-मच्छर छिपे रहते हैं। पशु चिकित्सक की सलाह से अमिट्राज या साइपरमेथ्रिन जैसी औषधियों का उचित मात्रा में छिड़काव पशु के शरीर और पशुशाला में करें। नीम के तेल में कपूर मिलाकर पशु के शरीर पर लगाने से मक्खियां और मच्छर दूर रहते हैं।

  • आंतरिक परजीवियों का नियंत्रण/ डीवार्मिंग: बरसात में दूषित घास के माध्यम से पेट के कीड़ों (फेफड़े, यकृत और आंत के परजीवी) के अंडे पशु के शरीर में चले जाते हैं। मानसून की शुरुआत में ही सभी छोटे-बड़े पशुओं को पेट के कीड़ों की दवा (अल्बेंडाजोल / फेनबेंडाजोल) अवश्य दें। गाभिन पशुओं के लिए सुरक्षित दवा का ही चयन करें।


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