ग्वार में पैराविल्ट रोग का खतरा, किसान ऐसे करें प्रभावी नियंत्रण 

नई दिल्ली 26-Aug-2026 05:50 PM

ग्वार में पैराविल्ट रोग का खतरा, किसान ऐसे करें प्रभावी नियंत्रण 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बायें बॉक्स का टेक्स्ट: भूमि में अधिक विद्युत चालकता, लवणता युक्त जल का प्रयोग होता है, वह भूमि जिसमे कार्बनिक पदार्थों की मात्रा कम होती है भूमि संरचनात्मक दृष्टि से अधिक कठोर और वॉटर होल्डिंग कैपेसिटी (जल धारण और अवशोषण) क्षमता कम होती है। इस स्थिति में ग्वार में पैराविल्ट के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

पैराविल्ट नियंत्रण के उपाय : भूमि में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ानी चाहिए, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति, जल धारण और अवशोषण क्षमता बढ़ती है। भूमि अधिक रंध युक्त वायुसंचार वाली संरचनात्मक दृष्टि से जड़ तंत्र के विकास के अनुकूल होती है। पौधों में भूमि से पोषक तत्वों के अवशोषण की सुगमता बढ़ती है। जिससे पौधा स्वस्थ और बढ़वार अच्छी होती है। ट्यूबवैल का जल सिंचाई पानी के रूप में प्रयोग से पूर्व जल नमूना लेकर प्रयोगशाला में जांच करवा ले कि पानी फसल के अनुकूल है और ध्यान रखे अधिक विद्युत चालकता लवणीय जल का प्रयोग सिंचाई पानी के रूप में नहीं करें। ट्यूबवैल के जल का सिंचाई पानी के रूप में होता है। वहां ढैंचा फसल का हरी खाद के रूप में प्रयोग करें।

फसल चक्र अपनाना चाहिए

भूमि में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। फसल से बुवाई पूर्व 15 से 20 क्विंटल सड़ी गली गोबर की खाद प्रति बीघा डालनी चाहिए।

बीज उपचार आवश्यक रूप से करे।

रासायनिक उपचार: भूमि में जल भराव, ठहराव उपरांत नमी से पौधो में जड़ गलन का प्रभाव हो तो इसके नियंत्रण के लिए खड़ी फसल में कार्बेन्डाजीम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा ट्राइकोडर्मा एस .पी . पी. 5 से 6 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से पौधो की जड़ भाग के पास ड्रेंचिंग करे।

जड़ गलन और उखेड़ा

जड़ गलन से पौधा सूख रहा है तो उखाड़ कर देखने पर पौधे की जड़ काली नजर आएगी इसके बचाव के लिए खड़ी फसल में कार्बेन्डाजीम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा ट्राइकोडर्मा एस .पी .पी. 5 से 6 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से पौधे के जड़ भाग के पास ड्रेंचिंग करे। स्थाई समाधान के लिए बुवाई पूर्व सड़ी गली गोबर की खाद में तैयार ट्राइकोडर्मा से भूमि उपचार करें। नरमा में उखेड़ा छोटे-छोटे स्पॉट (घेरे) में आता है। वहां पौधे सूख जाते हैं इसके लिए ट्राइकोडर्मा से दो-तीन वर्ष भूमि उपचार करें।


ट्रेंडिंग ख़बरें