अमरूद में रोग-कीट का कहर रोकें, अपनाएं ये असरदार नियंत्रण उपाय
(सभी तस्वीरें- हलधर)अमरूद के फल को ताजे खाने के साथ-साथ, व्यवसायिक रूप से प्रसंस्करित करके जैम, नेक्टर और स्वादिष्ट पेय बनाने में उपयोग किया जाता है। अमरूद की फसल को कई रोग हानि पहुंचाते हैं। जिनमे म्लानी रोग, तना केकर, एन्थ्रेक्नोज, स्कैब, फल विगलन, फल चित्ती और पौध अंगमारी प्रमुख हैं। अमरूद में लगने वाले कीट में तनाभेदक, छाल भक्षक इल्ली, स्केल कीट तथा फल मक्खी प्रमुख हैं। आलेख में अमरूद के पौधों में संरक्षण के उपाय सुझाए गए हैं।
उकठा रोग
रोकथाम के लिए कार्बेण्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 20 से 30 लीटर घोल प्रति पेड़ अथवा आवश्यकतानुसार मृदा का सिंचन (ड्रेच) करें अथवा ट्राईकोडर्मा 50 से 100 ग्राम प्रति पेड़ के हिसाब से थावलो में गुड़ाई कर सिंचाई से पूर्व मिलावें।
एन्थ्रेक्नोज
मैनकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फल आने तक 10 से 15 के अन्तराल पर छिड़काव करें।
फल सड़न
रोकथाम के लिए 2 ग्राम मैंकोजेब एक लीटर पानी में घोलकर 3–4 बार छिड़काव करे।
छाल भक्षक कीट
नियंत्रण के लिए क्युनालफॉस 2 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर शाखा, डालियों पर छिड़के। साथ ही, सुरुंग को साफ करके पिचकारी की सहायता से 3–5 मिली मिट्टी का तेल सुरंग में डालकर रूई के फोहे से सुरंग को बंद कर दें।
मिली बग
नियंत्रण के लिए डाइमिथोएट 1.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
फल मक्खी
कीट नियंत्रण हेतु विष चुग्गा बनाते हैं, एक लीटर पानी में 100 ग्राम चीनी अथवा गुड़ और 10 मिली मैलाथियॉन मिलाकर तैयार करें। मिट्टी के प्याले अथवा डिस्पोजल कप में 50 से 100 मिली भरकर 10 पौधों के मध्य एक के हिसाब से बाग में जगह-जगह पेड़ों पर टांग दें।