बेर के पेड़ों में बढ़ रहे ये 4 खतरनाक रोग, ऐसे करें बचाव 

नई दिल्ली 02-Nov-2026 04:22 PM

बेर के पेड़ों में बढ़ रहे ये 4 खतरनाक रोग, ऐसे करें बचाव 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

राजस्थान के प्राकृतिक सौंदर्य और खेती विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बेर की फसल है, जो खासतौर सूखे इलाकों में पाया जाता है। बेर के पेड़ राजस्थान के किसानों के लिए मुख्य आजीविका स्रोत हैं, लेकिन इनके संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बेर के वृक्ष को कई प्रकार के रोग प्रभावित करते हैं, जिनमें शामिल हैं झुलसा रोग, फलों पर काले धब्बे पड़ना, छाछ्या, सूटीमोलड् इत्यादि। बेर के पौधों के रोपण से पूर्व निम्नलिखित रोग निवारक उपाय अपनाएं:

  • ग्रीष्म ऋतु में बेर के बागानों की गहरी जुताई करें।

  • बागानी क्षेत्र में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

  • रोपण के लिए प्रतिरोधी/सहनशील किस्मों का प्रयोग करें।

  • बाग की मेड़ों के चारों ओर आकर्षक, विकर्षक पौधे उगाएँ।

  • मृदा परीक्षण की सिफारिशों के अनुसार खाद और उर्वरक का प्रयोग करें

बेर के प्रमुख रोग एवं रोकथाम

छाछ्या: पाउडरी फफूंद के लिए प्रतिरोधी किस्में उगाएं जैसे की सफेदा चयनित, ग्लोरी, ढाका-1 और ढाका-2। इसकी रोकथाम के लिए केराथेन एलसी. 1 मिली प्रतिलीटर पानी में मिलाकर रोग प्रभावित पत्तों पर छिड़काव करें। अथवा इस रोग के प्रबंधन हेतु 2 ग्राम घुलनशील गंधक प्रतिलीटर पानी में मिलाकर पत्तों और फलों पर छिड़काव करें। 15 दिन के अन्तर पर दो-तीन छिड़काव पूर्ण सुरक्षा के लिए आवश्यक होते हैं। अथवा 10 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू पी प्रति 10 लीटर पानी में घोलकर प्रति पेड़ पर छिड़काव करें। जरूरत पड़ने पर दोबारा छिड़काव करें। अल्काधीन बैंड को नियमित अंतराल पर साफकिया जाना चाहिए।

पत्ती धब्बा/झुलसा रोग

  • निचले इलाकों और बाढ़ वाले इलाकों में रोपण से बचें।

  • जब तक फसल में नमी की कमी के लक्षण दिखाई ना दें, तब तक सिंचाई ना करें।

  • नियंत्रण हेतु रोग दिखाई देते ही मैंन्कोजेब 3 ग्राम अथवा थायोफिमेट मिथाइल 1 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिन के अन्तर पर 2-3 बार छिड़काव करें।

पत्तों पर फंगस (सूट्रीमोलड्)

  • लक्षण दिखाई देने पर 300 ग्राम कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का प्रति 100 लीटर पानी में घोल तैयार करके छिड़काव करना चाहिए। अथवा मेनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर भी छिड़काव कर सकते है।

  • पत्तों पर से काली फफूंद हटाने के लिए तेज धार से किया गया पानी का छिड़काव भी असरदार होता है।

पत्तों पर काले धब्बे

  • रोकथाम के लिए 250 ग्राम मैंन्कोजेब 75 डब्लू पी का प्रति 100 लीटर पानी में घोल तैयार करके जनवरी महीने से लेकर फरवरी के मध्य तक 10 से 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए।

  • बेर में अनावश्यक सिंचाई ना करें।

  • रोपण के लिए अधिक नमी वाली भूमि का चयन ना करें।


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