अर्णब चक्रवात से खेतों में लौटी नमी, किसानों को पलेवा से मिली राहत 

नई दिल्ली 02-Nov-2026 02:25 PM

अर्णब चक्रवात से खेतों में लौटी नमी, किसानों को पलेवा से मिली राहत 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। सूखे की मार से दोचार कई जिलों के किसानों को अर्णब चक्रवात के प्रभाव से हुई अच्छी बारिश से राहत मिली है। किसानों का कहना है कि अब पलेवा करने की चिंता नहीं रही है। खेतों में पर्याप्त नमी आ जाने से सरसों और चना की बुवाई करना आसान हो गया है। गौरतलब है कि दीपावली का त्यौहार नजदीक आने के साथ ही मौसम में ठंडक़ घुलने लगी है। वहीं, खेतों में भी हरियाली की चादर दिखाई देने लगी है। इन दिनों किसान रबी फसल बुवाई कार्य में भी जुटे हुए है। गुनगुनी सर्दी के बीच रबी फसलों की बुवाई में बढौत्तरी दर्ज हो रही है। मैदानी भागों में अलसुबह कोहरे की चादर भी नजर आना शुरू हो गई है। वहीं, खेतों में अगेता पीला सोना (सरसों) दो से चार पत्ती होने लगा है। गौरतलब है कि रबी बुवाई के लिए एक करोड़ 20 लाख हैक्टयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नवम्बर माह से प्रदेश में गेहूं की बुवाई शुरू हो जायेगी। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी किसी भी जिलें से सरसों की फसल में पेन्टेड़ बग और आरामक्खी प्रकोप के समाचार नहीं है। लेकिन, किसान दोनों कीटों को लेकर सतर्क रहे। यह कीट नवांकुरित पौधें को चट करते है। सरसों की 8 से 12 दिन की अवस्था पर यह कीट पत्तियों का रस चूस कर फसल को पूर्णत नष्ट करने की क्षमता रखता है।  अत: प्रारंभिक अवस्था में फसल की निगरानी रखना अति आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कीट नियंत्रण के लिए शाम के समय फेनवलेरेट 6 किलो प्रति बीघा अथवा क्यूनॉलफॉस पाउडर 1.5 प्रतिशत 6 किलो प्रति बीघा की दर से भुरकाव करें। इसके पश्चात सरसों के 25 से 30 दिन की अवस्था पर आरा मक्खी नामक पत्तियों पर एक कीट दिखाई देगा जो पत्तियों की सतह को खाकर केवल डंठल छोड़ देती है। गौरतलब है कि अर्णब के कारण जयपुर, भीलवाड़ा, धौलपुर, अलवर, दौसा, अजमेर, नागौर, टोंक, करौली आदि जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिली है।

दे रहे हैं तकनीकी जानकारी

रबी की फसलों में गेहूं, जीरा, जौ, चना, तारामीरा और इसबगोल सहित दूसरे छोटे-मोटे अनाज की बुवाई की जाती है। राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र, अजमेर के अधिकारी किसान को जीरा, सौंफ, मैथी, अजवायन बुवाई की उन्नत शस्य क्रिया बता रहे हैं। उन्नत किस्म के बीज का उपयोग करने, बीजोपचार बाद बुवाई करने, गुणवत्तायुक्त कीटनाशक और फफूंदनाशक दवा के उपयोग की जानकारी किसान को दी जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिमी राजस्थान में जीरा, ईसबगोल, सौंफ की बुवाई किसान कर रहे है। वहीं, हाड़ौती संभाग में धनिया और लहसुन की बुवाई शुरू हो चुकी है।  

रबी बुवाई 10 लाख

रबी फसल की बुवाई लक्ष्य से 10.39 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। हालांकि, इस साल रबी बुवाई पिछले साल की सामानावधि से करीब दो लाख हैक्टयर पिछड़ी हुई है। क्योंकि, इस साल मानसून कम रहा है।  सरसों की बुवाई 8.81 और चना की बुवाई 85 हजार हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है।

आलू की बुवाई में रुचि

उधर, हाड़ौती संभाग में किसान आलू, मटर और लहसुन बुवाई में रूचि दिखा रहे है। जबकि, पश्चिमी राजस्थान में जीरा, ईसबगोल, मेथी जैसी फसलों की बुवाई तैयारियां शुरू हो चुकी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल भाव ठीक रहने से हाड़ौती संभाग में लहसुन का एरिया बढ़ सकता है।

पशुओं को ऐसे बचाएं सर्दी से

पशु वैज्ञानिक डॉ. सीएम यादव ने बताया कि पशुपालकों को पशुओं के लिए अपने घर के आस-पास ओट में एक कच्चा/पक्का पशु आवास बनाना चाहिए। जो कि हवा के रूख के विपरीत हो, आवास को साफ-सुथरा, सूखा रखें। पशुओं को ठण्ड से बचाव के लिए उनके ऊपर बारदाना, बोरी गर्म कम्बल डालकर ओढ़ाकर रखें। ऊंटों -घोड़ों पर झूल डालें, छोटे पालतु बछड़ों को गर्म कपड़े पहना कर ठण्ड से बचाए। पशुओं को खुले में ना छोड़े। पशुओं को संतुलित आहार दिया जाए। जिसमें दाना, गुड़ खल की उचित मात्रा शामिल हो। इन दिनों प्रसव का समय भी होने के कारण ब्याने के बाद पशुओं के बच्चों का  विशेष ध्यान रखा जाए। मां बच्चे को उचित आवास/ आहार प्रदान करें। पशु के बीमार होने पर पशु चिकित्सक से इलाज करवाएं।

शुष्क-साफ रहेगा मौसम

राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के अधिकांश जिलों में आगामी एक सप्ताह तक आसमान साफ रहने के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार भी मौसम शुष्क होने के साथ सुबह और शाम की ठंडक बढऩे की संभावना है। हालांकि, दिन के तापमान में धूप के कारण ज्यादा गिरावट नहीं आने के आसार हैं।

फसल बुवाई

गेहूं- 11 हजार

जौ-1 हजार

चना-85 हजार

सरसों-8.81 लाख

तारामीरा-9 हजार 


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