राजस्थान में मानसून लेट! खरीफ बुवाई पर बढ़ा बड़ा संकट
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश में मानसून शॉवर का दौर शुरू हो चुका है। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के चलते भी कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिल रही है। इससे खरीफ फसलों का बुवाई रकबा भी तेजी के साथ बढ़ रहा है। हालांकि, अभी राजस्थान में मानसून प्रवेश को लेकर स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक मानसून पिछले दो सप्ताह से तेलगांना में अटका हुआ है। इसके फिर 23 जून से सक्रिय होने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश में मानसून का प्रवेश जुलाई के प्रथम सप्ताह होने का अंदेशा है। इस स्थिति में किसानों के पास फसल बुवाई के लिए कम ही समय बचेगा। इस स्थिति में किसान पहले ही खाद-बीज की व्यवस्था जुटा ले। ताकि, एक-दो अच्छी बारिश के साथ ही बीज की बुवाई कर दें। गौरतलब है कि जिन किसानों ने पिछले दिनों हुई बारिश में बीज की बुवाई कर दी थी। उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। ज्यादा तापमान के चलते बीज जमी में ही दम तोड़ गया। साथ ही, कई किसानों को अंकुरण में भी समस्या झेलनी पड़ी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तेज गर्मी से कपास सहित जायद फल-सब्जी फसल प्रभावित हो रही है। आपको बता दें कि जायद में कपास, मूंग, बाजरा, मक्का, उड़द, तिल के साथ-साथ किसान कद्दूवर्गीय सब्जियो की बुवाई करते है। मानसून को लेकर किसानों का कहना है कि समय पर बरसात शुरू हो जाती है तो खरीफ खाद्यान्न फसलों की बुवाई समय पर हो सकेगी। अन्यथा, फिर मानसून की स्थिति को देखते हुए दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई को मजबूर होना पड़ेगा। बता दें कि खरीफ बुवाई के लिए किसानों ने खाद-बीज की व्यवस्था करना शुरू कर दिया है। इससे बीज बाजार में अच्छी चहल-पहल नजर आने लगी है। किसानों का कहना है कि खेत तैयार रहते हैं, तो अच्छी बारिश होने के बाद आसानी से बुवाई का काम हो जाता हैं। ग्रीष्मकालीन जुताई से फायदा यह होता है कि खरपतवार और जमीनी बीमारियों से फसल को सुरक्षा मिल जाती है। अन्यथा, खरपतवार उखाडऩे के लिए मजदूर लगाने पड़ते है अथवा खरपतावारनाशी का छिडक़ाव करना पड़ता है। इससे कृषि लागत में इजाफा हो जाता है।
मूँगफली हुई 4-6 पत्ती
बीकानेर संभाग में किसानों ने मूंगफली की बुवाई जोरो पर है। कृषि विभाग ने बीजोपचार के बाद ही बीज बुवाई की सलाह किसानों को दी है। बीजोपचार के अभाव में फसल में सफेद लट का प्रकोप ज्यादा देखने को मिलता है। गौरतलब है कि इस संभाग में कुछ किसानों ने मूंगफली की अगेती बुवाई की है। पौधे 4-6 पत्ती हो चुके है। कृषि विभाग के मुताबिक कपास के बाद मूंगफली की अच्छी बुवाई प्रदेश में दर्ज हुई है। करीब साढे 17 लाख हैक्टयर क्षेत्र में खरीफ फसलो की बुवाई हो चुकी है।
मानसून से जुड़ा है बाजरे का भविष्य
प्रदेश में बाजरे की बुवाई मानसून की बरसात पर निर्भर होगी। क्योंकि, बाजरा बुवाई का वैज्ञानिक समय शुरू हो चुका है। किसान जुलाई माह के तीसरे सप्ताह तक बाजरे की बुवाई कर सकें गे। आपको बता दें कि प्रदेश में बाजरे की बुवाई 43 लाख हैक्टयर क्षेत्र में होती है। बारानी भूमि वाले चारा और खाद्यान्न उत्पादन की दृष्टि से बाजरे की बुवाई खरीफ में करते है। यदि मानसून समय पर आ जाता है तो प्रदेश में बाजरे की अच्छी बुवाई होने की संभावना है।
फलदार पौधों की सारसंभाल शुरू
बागवानी फसलों का उत्पादन लेने वाले किसानों ने मानसून पूर्व बगीचों की सारसंभाल शुरू कर दी है। किसान खरपतवार हटा रहे है। साथ ही, अमरूद, संतरा, आम, किन्नू, नीबूं सहित दूसरे फलदार पौधों पर बोर्डो मिश्रण का लेप चढ़ा रहे है। ताकि, जड़ और तनागलन बीमारी से पौधों को बचाया जा सके। किसान नीला थोथा, चूना और पानी को क्रमश: 1:1:10 के अनुपात में बोर्डो मिश्रण तैयार करके 6 घंटे भिगो दें। इसके बाद जमीन से 3 फीट ऊंचाई तक मिश्रण का लेप पौधों पर करें। इसके अलावा थावलो की साफ सफाई कर संतुलित मात्रा में उर्वरक देंवे।
नींबू में झुलसा
इन दिनों बढ़ते तापमान के साथ नींबू के पेड़ों में झुलसा रोग बढ़ रहा है। इस कारण टहनियां सूख रही हैं और पत्तियां भी झुलसी हुई स्थिति में नजर आ रही हैं। ऐसे मेें किसान सूखी हुई टहनियां 5 सेंटीमीटर तक काटकर जला दें। साथ ही, टहनियों, पत्तियों पर कार्बेण्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिडक़ाव करें। सात दिन के बाद दूसरा छिडक़ाव 3 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को एक लीटर पानी में मिलाकर करना चाहिए।
मूंगफली में कॉलर रॉट रोग
कॉलर रॉट रोग से समुचित बचाव के लिए मृदा उपचार, बीजोपचार और रोग प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करना चाहिए। बुवाई से पूर्व 2.5 किलो ट्राइकोडर्मा 100 किलो गोबर में मिलाकर एक हैक्टयर क्षेत्र में मिलावें। साथ ही, कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत+थाइरम 37.5 प्रतिशत का 3 ग्राम अथवा मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करें। अगर रासायनिक फफूंदनाशी का उपयोग कम करना हो तो 1.5 ग्राम थाईरम और 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा से प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।
जुलाई में मानसून का प्रवेश
मौसम विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के मुताबिक प्रदेश में मानसून का प्रवेश जुलाई में होता नजर आ रहा है। फिलहाल, उदयपुर , चित्तौडग़ढ़, चूरू, झुंझुनूं, जिले में अच्छी बारिश दर्ज हुई है। गौरतलब है कि मौसम विभाग ने मानसून प्रवेश की संभावित तारीख का अभी ऐलान नहीं किया है।