जलवायु परिवर्तन से गेहूं की फसल पर बढ़ा खतरा, उत्पादन और गुणवत्ता हो रही प्रभावि
जलवायु परिवर्तन से गेहूं की फसल पर बढ़ा खतरा, उत्पादन और गुणवत्ता हो रही प्रभावि
(सभी तस्वीरें- हलधर)जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत की खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ता तापमान, खासकर सर्दियों में गर्मी बढ़ना और रात के समय तापमान ज्यादा होना, गेहूं की फसल के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इससे गेहूं का उत्पादन और उसकी गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
पर्यावरण संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में फसल की वृद्धि दर में गिरावट देखी गई है।
रात की बढ़ती गर्मी बनी चिंता का कारण
रिपोर्ट में कहा गया है कि रात के समय तापमान बढ़ने से गेहूं के पौधों पर बुरा असर पड़ता है। गर्म रातों के कारण पौधे ज्यादा ऊर्जा खर्च करते हैं, जिससे दानों के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व कम पड़ जाते हैं।
इसके अलावा फरवरी और मार्च में अचानक बढ़ने वाली गर्मी गेहूं के दाने बनने की प्रक्रिया को जल्दी खत्म कर देती है। इससे दाने छोटे रह जाते हैं और फसल की गुणवत्ता भी घट जाती है।
किसानों को हो रहा नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें खराब अंकुरण, फसल की धीमी वृद्धि, कीटों का बढ़ता प्रकोप और उत्पादन में कमी शामिल हैं। छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
बेमौसम बारिश भी बढ़ा रही परेशानी
रिपोर्ट में बताया गया है कि कटाई के समय होने वाली बेमौसम बारिश भी फसल को नुकसान पहुंचा रही है। इससे खेतों में तैयार फसल खराब होती है और भंडारण के दौरान भी नुकसान बढ़ जाता है।
क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को जलवायु-अनुकूल खेती अपनाने की जरूरत है। इसके लिए समय पर बुवाई, गर्मी सहन करने वाली गेहूं की किस्मों का उपयोग, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और मौसम आधारित सलाह सेवाओं को बढ़ावा देना जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में देश की खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को नई तकनीक और बेहतर संसाधनों से जोड़ना समय की मांग है।