दक्षिणी राजस्थान में जल्द पहुंचेगा मानसून, किसानों को बारिश का इंतजार
दक्षिणी राजस्थान में जल्द पहुंचेगा मानसून, किसानों को बारिश का इंतजार
(सभी तस्वीरें- हलधर)दक्षिणी राजस्थान में इस सप्ताह मानसून की एंट्री होने की संभावना है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत में बहुत तेज या भारी बारिश की उम्मीद नहीं है। मानसून के पहले चरण में रुक-रुक कर बारिश होगी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह से बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बरसात का दौर शुरू होने की उम्मीद है। आमतौर पर हर साल 18 से 22 जून के बीच अरब सागर से आने वाली मानसून की शाखा मेवाड़ के रास्ते राजस्थान में प्रवेश कर जाती है, लेकिन इस बार मानसूनी हवाओं की गति धीमी होने के कारण इसकी आधिकारिक एंट्री में देरी हो रही है। मानसून की इस देरी का असर अब मौसम और खेती-किसानी दोनों पर साफ दिखाई देने लगा है।
प्री-मानसून बारिश थमी, बढ़ी गर्मी और उमस
मौसम विशेषज्ञ प्रो. नरपतसिंह राठौड़ के अनुसार पिछले कुछ दिनों से प्री-मानसून की बारिश पूरी तरह थम गई है। इसके चलते उदयपुर सहित पूरे मेवाड़ संभाग में गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
रविवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान करीब दो डिग्री बढ़कर 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं हवा में नमी का स्तर 72 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसके कारण दिन में तेज धूप और शाम को भारी उमस से लोग बेहाल रहे।
झीलों का घटता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता
मानसून में देरी का असर उदयपुर की प्रसिद्ध झीलों पर भी दिखने लगा है। शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली फतहसागर झील का जलस्तर लगातार घट रहा है। पानी कम होने से झील के किनारों पर सूखी जमीन नजर आने लगी है। झीलों में घटते पानी ने प्रशासन और शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है।
शुरुआती चरण में हल्की बारिश, फिर होगी झमाझम बरसात
प्रो. नरपतसिंह राठौड़ का कहना है कि मानसून के पहले चरण में बहुत भारी बारिश के संकेत नहीं हैं। शुरुआती दिनों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होगी। इस दौरान आसमान में बिजली चमकने, गरजने और तेज हवाएं चलने की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं।
हालांकि, जुलाई के पहले सप्ताह से मानसून पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है और इसके बाद प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी और व्यापक बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
आखिर क्यों हो रही है मानसून में देरी?
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की धीमी रफ्तार के पीछे कई बड़े भौगोलिक कारण हैं। प्रशांत महासागर में अलनीनो का प्रभाव, लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और पामीर एवं हिंदुकुश पर्वतों पर हो रही बर्फबारी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
इन परिस्थितियों के कारण मैदानी इलाकों में आवश्यक कम दबाव का क्षेत्र विकसित नहीं हो पा रहा है। साथ ही हवा की दिशा में बदलाव होने से मानसूनी बादलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल रही, जिससे मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
बारिश के इंतजार में किसान, राहत की आस लगाए शहरवासी
मानसून में देरी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। अच्छी बारिश के बिना बुवाई का काम प्रभावित हो रहा है और कई क्षेत्रों में किसान खेत तैयार होने के बावजूद बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शहरों में रहने वाले लोग भी उमस भरी गर्मी से परेशान हैं और मानसून की पहली तेज बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अगर मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है, तो अगले दो-तीन दिनों में दक्षिणी राजस्थान में मानसून दस्तक दे सकता है और जुलाई की शुरुआत के साथ प्रदेश में झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है।