प्रदेश के कई जिलों में आंधी-ओलावृष्टि से किसानों पर दोहरी मार, तैयार फसलें..

नई दिल्ली 31-Mar-2026 04:37 PM

प्रदेश के कई जिलों में आंधी-ओलावृष्टि से किसानों पर दोहरी मार, तैयार फसलें..

(सभी तस्वीरें- हलधर)

राजस्थान में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में तैयार खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। खासतौर पर कोटा, बूंदी, नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों में ओले गिरने से गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कटाई के लिए तैयार फसलें खेतों में गिर गईं या भीगकर खराब हो गईं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।

बीते 24 घंटे में कई जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। कोटा में सबसे अधिक 20 एमएम बारिश हुई, जबकि अलवर के कोटकासिम और टपूकड़ा में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। नागौर और डीडवाना-कुचामन के ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल दोनों को नुकसान हुआ है। किसानों के सामने अब अनाज की गुणवत्ता खराब होने और मंडी में कम भाव मिलने की चिंता खड़ी हो गई है।

तापमान गिरा, लेकिन किसानों की बढ़ी चिंता

आंधी-बारिश के कारण प्रदेश के कई शहरों में तापमान 2 से 6 डिग्री तक गिर गया, जिससे आमजन को गर्मी से राहत मिली। लेकिन किसानों के लिए यह राहत नुकसान में बदल गई है। इस समय अधिकांश क्षेत्रों में कटाई का काम चल रहा है, ऐसे में बारिश और नमी से फसल खराब होने का खतरा और बढ़ गया है।

आगे भी मौसम का असर जारी

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 31 मार्च को सीकर और झुंझुनूं समेत 7 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही अप्रैल के पहले सप्ताह में भी इस सिस्टम का असर रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ दिनों बाद मौसम साफ होने और तापमान बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, बेमौसम बारिश से लगातार हो रहे नुकसान के बीच किसान अब सरकार से जल्द गिरदावरी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी आर्थिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकें।


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