खरबूजा बीज पैदावार मेहनत कम मुनाफा ज्यादा

नई दिल्ली 23-Jun-2026 04:45 PM

खरबूजा बीज पैदावार मेहनत कम मुनाफा ज्यादा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। मगज को लेकर कई किस्से, कहावते और मुहावरे है। लेकिन, अधिकांश का उपयोग इंसान के लिए ही होता रहा है। किंतु, जब मगज शब्द का प्रयोग जमीन के लिए हो तो आश्चर्य होना लाजमी है। दरअसल, ये वो मगज नहीं है, जिसके बारे में आप सोच रहे है। यहां हम बात कर रहे है खरबूजा बीज की। कोटा जिले में करीब 500 बीघा जमीन में किसान खरबूज की पैदावार केवल बीज यानी मगज के लिए कर रहे है। क्योंकि, इस काम से किसानों को लाखों रूपए की आमदनी मिल रही है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक खरबूजा बीज के लिए किसानों को किसी ने प्रोत्साहित नहीं किया है। अच्छी कमाई होने से किसान जुड़ते गए और जिले में खरबूज फसल का रकबा बढ़ता गया। किसानों का कहना है कि इस फसल में लागत से कही ज्यादा मुनाफा है। पिछले साल एक किलो बीज के 350 रूपए मिले थे। जबकि, इस साल प्रति किलो बीज का भाव 250 रूपए चल रहा है। उन्होंने बताया कि इस खेती में बार-बार बाजार जाने की जरूरत भी नहीं है। क्योंकि, पूरा बीज निकालने के बाद या तो व्यापारी गांव में आ जाते है। या फिर, समूह में किसान बिक्री स्थल तक पहुंचा देते है।

एमपी से है क नेक्शन

उद्यान विभाग कोटा के उपनिदेशक एनबी मालव ने बताया कि दो साल के भीतर खरबूज खेती को करीब 500 बीघा जमीन में विस्तार मिलना बड़ी बात है। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि जहां किसान को मुनाफा नजर आता है, किसान का रूझान उस फसल की ओर स्वत: ही बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के गांधीसागर बांध में पिछले कुछ सालों से किसान पेटाकाश्त जमीन में खरबूज से मगज तैयार करके बाजार मेें बिक्री कर रहे है। इससे उनको कम समय, कम लागत में अच्छी कमाई हो रही है। वहां के किसानों के चलते कोटा जिले में खेड़ारूधा, रीछी, बलाकू सहित आधा दर्जन गांवों में खरबूज फसल का दायरा बढक़र 500 बीघा तक पहुंच चुका है।

बिक्री के जाते है गांधीसागर

किसान मुकेश अहीर ने बताया कि खरबूज को पूरी तरह से पकने के बाद बीज निकाल लिया जाता है। फिर, बीज को सूखाकर और साफ करके बैग में भर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि इस साल 10 बीघा जमीन में ख्ररबूजे की फसल से 10 क्विं टल से ज्यादा बीज तैयार हुआ है। उन्होंने बताया कि बीज की बिक्री के लिए गांधीसागर जाते है।

अब जैविक धनिया की तैयारी

उपनिदेशक मालव ने बताया कि विभाग इन गांवों के किसानों को अब जैविक धनिया की खेती से जोड़ रहा है। आईपीएम योजना के तहत किसानो को जैविक धनिया फसल उत्पादन का प्रशिक्षण मुहैया करवाया जाएगा। साथ ही, आईपीएम किट भी उपलब्ध करवाई जायेगी।


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