MBA के बाद किसान ने चुनी खेती, अमरूद से सालाना 35 लाख कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)
दौलाड़ा, सवाईमाधोपुर। खेती में फसल बदलने का एक फैसला किसान की आमदनी की तस्वीर बदल सकता है। किसान जयंतराज राजावत ने यही किया। परिणाम रहा कि सालाना 4-5 लाख रूपए की आमदनी देने वाले खेत अब अमरूद की फसल से ही सालाना 35 लाख रूपए की आमदनी दें रहे है। वहीं, परम्परागत फसलों से मिलनी वाली आय अलग। गौरतलब है कि खेती में रवानी भरने में जयंत के भाई विक्रम सिंह की मेहनत को भुलाया नहीं जा सकता है। किसान जयंतराज ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 40-50 बीघा जमीन है। पिताजी के खेती संभालने तक पढ़ाई की। वर्ष 2011 में एमबीए किया और गांव लौट आया। फिर, आईटीआई में अनुदेशक के रूप में सेवाएं देने लगा। करीब 8 साल अनुदेशक की नौकरी की। इसके बाद खेती से जुड़ गया और अब दोनों भाईयों की मेहनत और सोच का परिणाम सबके सामने है। उन्होंने बताया कि एक समय था जब सोयाबीन की भी अच्छी पैदावार मिलती थी। लेकिन, अब वो बात नहीं रही। इसके चलते कुछ नया सोचने को मजबूर हुए और अमरूद फसल का रूख किया। उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए बांध और कुएं का पानी उपलब्ध है। परम्परागत फसलों में सरसों, गेहूं,उड़द का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
30 बीघा क्षेत्र में अमरूद
खेती में बेहतर संभावनाओं को देखते हुए कि सान जयंतराज ने परंपरागत फसलों तक सीमित रहने के बजाय फल उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने अमरूद की बागवानी को चुना और वर्ष 2018 में 30 बीघा क्षेत्र में अमरूद का बगीचा तैयार किया। अमरूद के पौधों की नियमित देखभाल और बेहतर बाग प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि कुछ वर्षों में बगीचा उत्पादन देने लगा। अब इसी बागवानी से जयंतराज को सालाना करीब 35 लाख रुपए की आमदनी हो रही है।
अपने साथ दूसरों को रोजग
जयंतराज की बागवानी केवल उनकी आमदनी तक सीमित नहीं है। अमरूद के बगीचे की देखभाल, सिंचाई, फल तुड़ाई और दूसरे कृषि कार्यों के लिए श्रमिकों की जरूरत पड़ती है। इससे करीब 10 से 15 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
स्टोरी इनपुट- मोहन सैनी, कृषि विभाग, सवाईमाधोपुर