उदयपुर के किसान ने बदली खेती, खीरा और बागवानी से लाखों की कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)
फलीचड़ा खेड़ी, उदयपुर। वाणिज्य पढ़ा, फिर भी सही समय पर सही जानकारी नहीं मिल पाई। इस कारण खेतों में हूॅ। यह कहना है किसान रतनलाल जाट का। जो संरक्षित खेती से सालाना 30 लाख रूपए की शुद्ध आय प्राप्त कर रहे है। साथ ही, सब्जी और बागवानी फसलों से भी अच्छी आय प्राप्त कर रहे है। उनका कहना है कि किन्नू से आमदनी मिलना शुरू हो चुकी है। जबकि, पपीता की बिक्री भी एक दो सप्ताह बाद शुरू हो जायेगी। किसान रतनलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि वर्ष 1988 में बीकॉम की। इसके बावजूद भी नौकरी लग पाया। समय पर सही मार्गदर्शन नहीं मिला, इसके चलते खेती से जुड़ गया। उन्होने बताया कि मेरे पास 4 हैक्टयर कृषि भूमि है। सिंचाई के लिए कुआं और ट्यूबवैल है। उन्होने बताया कि पहले तो परम्परात फसलों का उत्पादन लेता रहा। वर्ष 2002 में कृषि विज्ञान केन्द्र, उदयपुर के वैज्ञानिकों से सम्पर्क हुआ। इसके बाद खेती में बदलावा लाना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में अमरूद का बगीचा स्थापित किया। इस बगीचे से सालाना 4 लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। लेकिन, पौधें उम्रदराज हो गए थे। इस कारण बगीचे को नष्ट करके अब पपीता की बागवानी अपनाई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश जमीन बागवानी और संरक्षित खेती के दायरे में आ चुकी है। इस कारण परम्परागत फसलों का उत्पादन घरेलू आवश्यकता पूर्ति लायक ही करता हॅू।
पपीता का बगीचा
उन्होंने बताया कि अमरूद का बगीचा नष्ट करने के बाद डेढ़ हैक्टयर क्षेत्र में पपीता का बगीचा स्थापित किया है। पौधों पर अच्छे फल लगे है। आमदनी कितनी मिलेगी, यह फल तुड़ाई के बाद ही पता चल पायेगा। गौरतलब है कि बगीचे में 2 हजार पौधें पपीता के लगे हुए है। वैसे एक पौधें से 800-900 रूपए की औसत आय मानी जाती है। उन्होंने बताया कि एक-दो सप्ताह में फल बाजार में पहुंचना श्ुारू हो जायेंगे।
किन्नू से तीन लाख
उन्होंने बताया कि पपीता की खेती से पूर्व वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में डेढ़ हैक्टयर क्षेत्र में वर्ष 2021 में किन्नू का बगीचा स्थापित किया। इससे अब उत्पादन मिलने लगा है। सालाना किन्नू की खेती से 3 लाख रूपए की आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि बगीचे के मध्य ड्रिप और मल्च के साथ गोभी और मिर्च का उत्पादन लेता हॅू। इससे लाख रूपए की बचत मिल जाती है।
12 हजार वर्ग मीटर में संरक्षित खेती
उन्होने बताया कि बागवानी और सब्जी फसलों से मिली सफलता को देखते हुए वर्ष 2024-25 के दौरान पहला पॉली हाउस लगाया। इससे आमदनी अच्छी मिली तो 4-4 हजार वर्ग मीटर में एक पॉली हाउस और एक शैडनेट हाउस और लगा लिया। वर्तमान में तीनों संरचनाओं में खीरा फसल का उत्पादन ले रहा हॅू। एक फसल से औसत 5 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। इस तरह सालाना 30 लाख रूपए की बचत हो रही है।
घी से पशुधन का खर्च
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 1 गाय और 1 भैंस है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। खेत पर सात श्रमिक काम करते है। चाय-पानी के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट खेतों मेें काम आ जाता है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. दीपक जैन, केवीके, उदयपुर