सब्जी बेच मजदूर बना मालामाल, रोजाना कमाई 10 हजार
(सभी तस्वीरें- हलधर)
सोपरी, राजसमंद। पेट भरने की कशमकश पढ़े-लिखे आदमी को भी मजदूर बना देती है। इस कहानी के किरदार है भैरूलाल रेगर। जिन्होंने स्नातक द्वितीय वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी। जब पेट अपना हिसाब मांगने लगा तो मार्बल कारीगर के साथ हेल्पर के रूप में काम करने लगे। लेकिन, अच्छे जीवन की चाहत का यह मुकाम नहीं था। 15 रूपए का इंतजाम करके नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ गए। दो महीने काम किया और वहां से सीधे खेतों में लौट आए। परिणाम रहा कि अब बड़े सब्जी उत्पादक बनकर प्रतिदिन 10 हजार रूपए का मुनाफा कमा रहे है। किसान भैरूलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि खेती से जुडऩे से पहले काफी कुछ अनुभव कर चुका हॅू। शायद, उन्हीं अनुभवों ने मुझे कुछ नया करने का हौंसला दिया और अब परिणाम सबके सामने है। गौरतलब है कि किसान भैरूलाल तकनीक आधारित सब्जी उत्पादन में अपने जिले के अग्रणी किसान बन चुके है। उन्होंने बताया कि परिवार के पास तो आठ बीघा जमीन है। पर, जमीन के इस रकबे से परिवार का खर्च निकलना काफी मुश्किल है। इसके चलते 65 बीघा जमीन लीज पर लेकर उद्यान विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में सब्जी फसलों की खेती करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे आय बढ रही है, उससे खेतों को आधुनिक कृषि तकनीक के सांचे में ढ़ालता जा रहा हॅू। ताकि, सालभर सब्जी फसल उत्पादन का रोड़मैप तैयार हो सके। बता दें कि भैरूलाल को सब्जी उत्पादन से जुड़े हुए करीब 5 साल हो चुके है। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं और लहसुन की फसल शामिल है।
खरीदी साढे 3 बीघा जमीन
उन्होंने बताया कि पांच वर्षो के दौरान मिले मुनाफे से साढे तीन बीघा जमीन की खरीदी है। इसमें भी फसलों का उत्पादन लेना शुरू कर दिया है। इससे मुनाफा बढने की उम्म्मीद है।
सब्जी फसलों में यह
उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों मेंं भिंड़ी, करेला, लौकी, तरबूज, पत्ता और फूलगोभी का उत्पादन लेता हॅू। प्रतिदिन मंड़ी से 17 हजार रूपए आ रहे है। इसमें से करीब 7 हजार रूपए खर्च के निकाल दें तो 10 हजार रूपए प्रतिदिन की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि बेलदार सब्जी फसलों के खत्म होने के बाद 30 बीघा क्षेत्र में फूलगोभी की बुवाई करूंगा। इसके लिए पौध तैयार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए पहले मिनी स्प्रिंकलर का उपयोग कर रहा था। लेकिन, अब जल बचत के लिए 10 बीघा क्षेत्र में बूंद-बूंद सिंचाई को अपनाया है।
मचान विधि से खेती
उन्होंने बताया कि बेलदार सब्जी फसलों के लिए मचान विधि का उपयोग करता हॅू। इससे फल की गुणवत्ता अच्छी बनी रहती है। इससे बाजार भाव भी अच्छे मिलते है।
स्टोरी इनपुट: दिनेश बारोलिया, सहायक कृषि अधिकारी-उद्यान, देेवगढ़