खेती के समन्वित मॉडल ने पहुंचाया समृद्धि की रहा तक
(सभी तस्वीरें- हलधर)हलधर टाइम्स/ धनकौली, नागौर। खेती से परिवार की आर्थिकी चलाना किसानों के लिए टेढ़ी खीर साबित होता जा रहा है। लेकिन, कुछ किसान ऐसे भी है जो नवाचार अपनाकर आर्थिक तौर पर समृद्ध भी हुए है। ऐसे ही एक किसान है सम्पत कुमार हर्षवाल। जिन्होंने खेती के समन्वित मॉडल को अपनाकर अपनी आय बढ़ाई है। पहले सम्पत को खेती से सालाना एक लाख रूपए से कम आय मिलती थी। लेकिन, अब आय का आंकड़ा 6लाख रूपए तक पहुंच चुका है। जबकि, बागवानी फसलों का उत्पादन मिलना अभी शेष है। किसान सम्पत कुमार ने हलधर टाइम्स को बताया कि बंटवारे से पहले खेती का काम पिताजी और बड़े भाई देखते थे । इस दौरान १०वीं पास करने के साथ ही मैं रोजगार की तलाश में आसाम चला गया। वहां, मिठाई की दुकान पर करीब ढाई दशक तक 15 हजार रूपए प्रति माह मेहनताने में काम किया। 5-6 साल पहले की गांव लौटा हूँ। यहां आकर आजीविका का मेरे पास एक ही साधन था, वह खेती। इसलिए जमा पूंजी से हिस्से आई 9 बीघा जमीन में सिंचाई की सुविधा विकसित की। इसके बाद परम्परागत फसलों की खेती करना शुरू किया। लेकिन, इन फसलों में मुनाफा कम लगा। इसके चलते सब्जी उत्पादन से जुड़ गया। सब्जी फसलों में आने वाली समस्याओं ने ही मुझे कृषि विज्ञान केन्द्र, मौलासर से जोड़ दिया। अब वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आय बढौत्तरी के प्रयास खेतों मे कर रहा हूँ। ताकि, खेत समन्वित कृषि का मॉडल बनकर क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी आधुनिक तौर-तरीकों से खेती करने की प्रेरणा दे सकें। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलो में अब केवल बाजरा और गेहूं का उत्पादन लेता हूँ।
2 बीघा क्षेत्र में सब्जी
उन्होंने बताया कि दो बीघा क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हूँ। सब्जी फसलों में तुरई, लौकी, टिण्ड़ा, ककड़ी, पत्ता-फूल गोभी बैंगन सहित दूसरी सब्जी फसल शामिल है। इन फसलों में खर्च निकालने के बाद प्रति बीघा 30-35 हजार रूपए की बचत मिल जाती उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों के उत्पादन में शुरूआती परेशानी जरूर आई। लेकिन, कृषि वैज्ञानिकों का साथ मिलने के बाद अब उत्पादन के साथ मुनाफा बढना शुरू हो गया है। है।
4 बीघा में बगीचा
उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर4 बीघा क्षेत्र में बगीचा स्थापित किया है। साथ ही, बूंद-बूंद सिंचाई को भी अपनाया है। सोलर पम्प लग चुका है। बगीचे में 150 पौधें अमरूद,115 पौधें नींबू, 20 पौधें आंवला और कुछ पौधे पपीता के शामिल है। खेत की मेड़ पर अशोका और मालाबार नीम के पौधें भी लगाएं है।
पशुधन से आय
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और1 भैंस है। प्रतिदिन उत्पादित दुग्ध में से ६ लीटर दुग्ध को 40-45 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर देता हूँ। इससे पशुधन के साथ-साथ परिवार का दैनिक खर्च निकल जाता है। पशु अपशिष्ट का उपयोग वर्मी खाद बनाने में कर रहा हूँ। वर्मी कम्पोस्ट की दो बेड मेरे पास है।