कम जमीन, ज्यादा मुनाफा: रमेश मीणा की सक्सेस स्टोरी
(सभी तस्वीरें- हलधर)प्रतापगढ़। 2 बीघा जमीन के रकबे में परम्परागत फसलों के उत्पादन से 30-35 हजार रूपए की आय खर्च निकालने के बाद मिलती थी। लेकिन, अब सब्जी उत्पादन से आय का आंकड़ा लाखों में पहुंच चुका है। यह कहना है किसान रमेश मीणा का। जो सब्जी उत्पादन से सालाना सवा दो लाख रूपए की आमदनी प्राप्त कर रहे हे। साथ ही, बकरीपालन और पशुपालन से भी जुड़े हुए है। किसान रमेशन ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 2 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि 8वीं पास करने के बाद से खेती कर रहा हॅू। पहले परम्परागत फसल उत्पादन तक सीमित रहा। लेकिन, अब तकनीक आधारित सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू।

इससे परिवार की आर्थिक स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला। यहां पर सब्जी उत्पादन की आधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी प्रदान की गई। फिर, सब्जी उत्पादन की अधिक जानकारी के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों से सम्पर्क किया। सब्जी उत्पादन का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। गौरतलब है कि किसान रमेश तीन साल पहले सब्जी उत्पादन से जुडे है। उन्होने बताया कि सब्जी उत्पादन से बेहत्तर आय को देखते हुए अब खेतों में परम्परागत फसलों का उत्पादन लेना बंद कर दिया है।
बूंद-बूंद से भरा घट
उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में दो बीघा क्षेत्र में प्लास्टिक मल्च और बूंद-बूंद सिंचाई का उपयोग करते हुए सब्जी उत्पादन शुरू किया। शुरूआती साल में आय का आंकड़ा थोड़ा कम रहा। लेकिन, अब बीघा से लाख से सवा लाख रूपए की आमदनी प्राप्त होने लगी है। उन्होंने बताया कि सब्जी फसलो में टमाटर, बैंगन, मिर्च सहित मौसमी सब्जी फसलों का उत्पादन लेता हॅॅू।

लाभकारी पशुपालन
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 10 भैंस ओर 20 बकरियां है। प्रतिदिन 15 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। इसमें से 12 लीटर दुग्ध उपभोक्ताओं को 50 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर रहा हूॅ। वहीं, बकरीपालन से सालाना 50 हजार रूपए की आय बकरा विपणन से हो जाती है। इस तरह खेती अब लाभकारी साबित हो रही है। उन्होने बताया कि पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग में ले रहा हॅू।