एमए पास किसान की हाईटेक खेती ने 4 लाख से 40 लाख पहुंचाई आय 

नई दिल्ली 31-Aug-2026 12:53 PM

एमए पास किसान की हाईटेक खेती ने 4 लाख से 40 लाख पहुंचाई आय 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

चुन्दड़ी, अजमेर। प्रतिस्पर्धा खुद से हो तो आय का पहाड़ खड़ा किया जा सकता है। एक साल प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में देने के बाद खेती से जुड़े किसान छितरमल जाट ने भी कभी नहीं सोचा था कि खेतों में की गई मेहनत इस कदर परिणाम देगी। गौरतलब है कि किसान छितरमल  8 हजार हैक्टयर क्षेत्र में संरक्षित खेती कर रहे है। जबकि, ओपन फील्ड वाली सब्जी फसलों का भी उत्पादन ले रहे है। इससे सालाना 38-40 लाख रूपए की शुद्ध बचत हो रही है। जबकि, पहले साधारण खेती में साल का 4-5 लाख रूपया मिलता था। किसान छित्तरमल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 63 बीघा जमीन है। इस कारण परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से ही सामान्य रही। इसके चलते स्नातकोत्तर करने के बाद एक साल प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को दिया। बाद में खेती से जुड़ गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में पहला पॉलीहाउस और छोटा फार्मपौंड़ बनाया। शुरूआती खीरे की फसल से करीब साढे 6 लाख रूपए का मुनाफा मिला तो रोजी-रोटी की फ्रिक छू होती नजर आई। इसके बाद ज्यादा पैदावार और आय बढ़ाने का जुनून पैदा हो गया। इसी का परिणाम है कि वर्तमान में 8 हजार हैक्टयर क्षेत्र में संरक्षित फसल का उत्पादन हो रहा है। वहीं, 4 हजार वर्ग मीटर में दो पॉली हाउस का काम इन दिनों प्रगति पर है। इन पॉली हाउस के बनने के बाद आय का आंकड़ा और बढऩे की उम्मीद है। उन्होने बताया कि संरक्षित खेती और ओपन फील्ड सब्जी फसल उत्पादन से जुडऩे के बाद परम्परागत फसलों का उत्पादन सीमित कर दिया है। रबी में गेहूं,जौ, चना और सरसों का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से दो से ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

ऐसे बढ़ा कारवां

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में स्थापित पॉली हाउस से करीब साढे 6 लाख रूपए की शुरूआती बचत मिली। समय के साथ ज्यादा पैदावार लेने की तकनीक समझ आ गई। इसके बाद वर्ष 2022 में 4 हजार वर्म मीटर क्षेत्र में एक और पॉली हाउस तैयार करवा लिया। सिंचाई की समस्या को देखते हुए उद्यान विभाग की मदद से 50 गुना 100 मीटर आकार का बड़ा फार्मपौंड़ बना लिया। क्योंकि, कुएं के पानी का टीडीएस ज्यादा था। इससे फ सल को नुकसान होने का डर था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इन पॉली हाउस में खीरा और रंगीन शिमला मिर्च का उत्पादन लेता हॅॅू। एक पॉली हाउस से खर्च निकालने के बाद सालाना 18 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

सब्जियों से 20 लाख

उन्होंने बताया कि हाईटेक खेती में सफलता के बाद क्षेत्र के किसानों को देखते हुए ओपन फील्ड में सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। उन्होंने बताया कि 2 एकड़ क्षेत्र में टमाटर, 2 एकड़ क्षेत्र में मचान आधारित करेला, 8 बीघा क्षेत्र में स्वीटकॉर्न और जुकनी-टिंड़ा का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से खर्च निकालने के बाद साल की 20 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

उन्नत पशुपालन

उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 गाय और 4 भैंस है। प्रतिदिन 1000-1200 रूपए की आमदनी दुग्ध बिक्री से मिल जाती है। पशुपालन से साल में ढ़ाई से तीन लाख रूपए की बचत हो जाती है। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग ले रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: सत्यनारायण चौधरी, चीफ ट्रेनर, आईएचआईटीसी, जयपुर