अब खेत बनेगा कमाई का ‘डबल इंजन’, नीचे फसल, ऊपर सोलर से बिजली

नई दिल्ली 22-Oct-2026 12:45 PM

अब खेत बनेगा कमाई का ‘डबल इंजन’, नीचे फसल, ऊपर सोलर से बिजली

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नई दिल्ली। देश के 85 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को खेती के साथ सौर ऊर्जा से अतिरिक्त आमदनी दिलाने के लिए एग्रीवोल्टाइक नीति को किसान हितैषी बनाने पर जोर दिया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत मंडपम में 7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन पर कहा कि किसान केवल ‘अन्नदाता’ नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी बनेगा। खेत में ऊपर सोलर पैनल से बिजली पैदा होगी और नीचे खेती जारी रहेगी।

चौहान ने स्पष्ट किया कि एग्रीवोल्टाइक का फायदा बड़े सोलर प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश में औसत जोत केवल 0.96 हेक्टेयर है, इसलिए मॉडल छोटे किसान के खेत पर व्यावहारिक और लाभकारी होना चाहिए। सोलर पैनल लगाने के कारण कृषि उत्पादन नहीं रुकना चाहिए और किसान को हर साल अपनी जरूरत के अनुसार फसल तथा फसल चक्र बदलने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

किसान पर नहीं पड़ेगा परियोजना बंद होने का बोझ

एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं में किसानों के आर्थिक हितों की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए चौहान ने कहा कि बिजली खरीद, ग्रिड कनेक्टिविटी और समय पर पारदर्शी भुगतान की पुख्ता व्यवस्था जरूरी है। यदि कोई कंपनी बीच में परियोजना छोड़ती है या अनुबंध खत्म होने पर सोलर पैनल हटाने पड़ते हैं तो उसका वित्तीय अथवा भौतिक बोझ किसान पर नहीं पड़ना चाहिए।

पैनल की ऊंचाई और खंभों के बीच दूरी ऐसी रखने की जरूरत बताई गई, जिससे ट्रैक्टर से जुताई और दूसरी कृषि गतिविधियां आसानी से हो सकें। पैनलों से गिरने वाले बारिश के पानी का निकास और संचयन भी इस तरह हो कि मिट्टी का कटाव न हो तथा सिंचाई में पानी का उपयोग किया जा सके।

एफपीओ से जुड़ेंगे किसान, गांव में युवाओं को रोजगार

सरकार एग्रीवोल्टाइक में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की सक्रिय भागीदारी पर भी जोर दे रही है। सोलर उपकरणों के संचालन, मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं व महिलाओं को देकर गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है। कृषि और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय इस दिशा में मिलकर काम करेंगे।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि पीएम कुसुम के तहत अब तक 30 लाख कृषि पंप सौर ऊर्जा से जोड़े जा चुके हैं। योजना के अगले चरण में बड़े स्तर पर एग्रीवोल्टाइक कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। इससे करीब 3.32 लाख पूर्णकालिक स्थानीय रोजगार पैदा होने का अनुमान है।

टेरी के अध्ययन के अनुसार देश की 11.6 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि में 4.75 करोड़ हेक्टेयर भूमि एग्रीवोल्टाइक के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त है। इसमें महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उपयुक्त भूमि के केवल 10 प्रतिशत हिस्से पर एग्रीवोल्टाइक अपनाने से 2050 की अनुमानित बिजली मांग पूरी करने की क्षमता बन सकती है। अध्ययनों में फसल उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। देश की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 308 गीगावाट पार कर चुकी है। कुल बिजली क्षमता 560 गीगावाट से अधिक हो गई है। सरकार का लक्ष्य सौर ऊर्जा के विस्तार का सीधा आर्थिक लाभ किसानों तक पहुंचाकर खेती की आमदनी का अतिरिक्त और स्थायी स्रोत तैयार करना है।


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