मोठ की खेती में कीट-रोग से बचाव के आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली 04-Aug-2026 02:12 PM

मोठ की खेती में कीट-रोग से बचाव के आसान और असरदार उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मोठ फसल के क्षेत्र और उत्पादन में राजस्थान अग्रणी है। प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर में भी मोठ की खेती प्रचलन में है। वर्षा आश्रित क्षेत्रों और कम उपजाऊ जमीनों में भी मोठ की खेती आसानी से की जा सकती है। मोठ फसल की औसत उपज काफी कम है। लेकिन, किसान उन्नत शस्य तकनीक को व्यवहार में लाकर और समय पर कीट रोग का नियंत्रण करके प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ा सकते हैं।

कीट नियंत्रण

  • दीमक:- अंतिम जुताई के समय क्लोरपाईरीफॉस पाउडर की 20-25 किलोग्राम की मात्रा प्रत्येक हेक्टेयर की दर से मिट्टी में मिला दे। बीज को बुवाई से पूर्व क्लोरपाईरीफॉस 2 मिली मात्रा को प्रति किलो बीज दर से उपचारित करें।

  • मोयला, हरा तेला, सफेद मक्खी:- इनकी रोकथाम के लिए मैलाथियॉन 50 ईसी. अथवा डायमिथोएट 30 ईसी. 1 लीटर प्रति 600-700 लीटर पानी अथवा मेलाथियान 5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। मोठ की फसल में रस चूसक कीटों की रोकथाम हेतु बुवाई से पूर्व फिप्रोनिल (5 एस.सी) दवा 4 मिली प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचार प्रभावी और लाभप्रद पाया गया है।

रोग नियंत्रण

  • पीला मौजेक विषाणु रोग:- इसके नियंत्रण के लिए डायमिथोएट 30 ईसी 1 लीटर 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

  • छाछ्या रोग: इसकी रोकथाम के लिए 2.5 किलोग्राम घुलनशील गंधक अथवा कैराथेन एलसी 1 लीटर 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। यह छिड़काव रोग के लक्षण दिखाई देते ही और दूसरा छिड़काव 10 दिन पर करें।


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