माइंस से खेतों तक का सफर, वैज्ञानिक खेती ने बदली किसान की जिंदगी 

नई दिल्ली 21-Sep-2026 02:20 PM

माइंस से खेतों तक का सफर, वैज्ञानिक खेती ने बदली किसान की जिंदगी 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

ढोलाजी का खेड़ा ;भीलवाड़ाद्ध। सीमित कृषि भूमि और पारंपरिक खेती से होने वाली कम आय के बावजूद किसान शंभूलाल मीणा ने वैज्ञानिक मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। महज 5 बीघा भूमि पर सब्जी उत्पादन और पशुपालन के जरिए उनकी सालाना कृषि आय अब करीब दो लाख रुपये तक पहुंच गई है। पहले इसी भूमि से उन्हें 60-70 हजार रुपये सालाना की आय होती थी। शंभूलाल मीणा ने हलधर टाइम्स को बताया कि कभी स्कूल का मुहं नहीं देखा। होश संभालने के साथ ही खेतों में पाया। पहले पारंपरिक फसलों का उत्पादन करता रहा। लेकिन, सीमित आय से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। इस कारण मांडलगढ़ क्षेत्र की एक माइंस में करीब सात वर्ष तक काम किया। बाद में काम छोडक़र दोबारा खेती से जुड़ गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात कृषि विज्ञान केन्द्रए भीलवाड़ा के वैज्ञानिकों से हुई। वैज्ञानिकों ने पानी की उपलब्धता को देखते हुए उन्हें सब्जी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी। किसान पारंपरिक फसलों के रूप में गेहूं, मक्का, सरसों, मसूर, मूंगफली और उड़द का भी उत्पादन लेते हैं। इन फसलों से भी उन्हें सालाना आय प्राप्त होती है।

सब्जी खेती से बढ़ी आमदनी

वैज्ञानिकों के निर्देशन में शंभूलाल ने लौकी, मिर्च और टमाटर का उत्पादन शुरू किया। उनके अनुसारए मिर्च की फसल में अन्य सब्जियों की तुलना में बेहतर मुनाफ ा मिलता है। मिर्च और टमाटर की खेती से लागत निकालने के बाद करीब एक लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। सब्जी उत्पादन में सफलता के बाद उन्होंने गेंदा फूल की खेती भी शुरू की है, जिससे अब आमदनी प्राप्त होने लगी है।

पशुपालन से हर माह अतिरिक्त आय

शंभूलाल के पास छह भैंस और छह गाय हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वे एक समय का दूध डेयरी को बेचते हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये का मुनाफ ा मिल रहा है। किसान के अनुसारए पशुधन का प्रबंधन भी वे वैज्ञानिक विधि से कर रहे हैं। इसके अलावा बैक यार्ड मुर्गीपालन से भी जुड़े हुए है। इससे 15-20 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।

स्टोरी इनपुट: डॉ. सीएम यादव, कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा


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