बकरी पालन से बदली किस्मत! किसान बना लखपति, पक्का किया अपना आशियाना
(सभी तस्वीरें- हलधर)
बाणनाथपुरा, चित्तौडग़ढ़। गरीब की गाय यानी बकरी का प्रबंधन वैज्ञानिक तौर-तरीके से किया जाए तो दिन बदलते ज्यादा समय नहीं लगता। बकरी पालन से लखपति होने का गौरव पाया है किसान सोहनलाल सालवी ने। जिन्होने 4 साल पहले 10 बकरी से अपना काम शुरू किया और घर को पक्का करवाने के साथ-साथ सालाना डेढ़ से पौने दो लाख रूपए का मुनाफा भी कमाया। किसान सोहनलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से ही कमजोर रही। पिताजी के लकवा का शिकार हो जाने के बाद खेती की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। यही कारण रहा है कि आठवीं के बाद पढ़ाई छोडऩी पड़ी। उन्होंने बताया कि बकरीपालन से जुड़े हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। करीब 4 साल से बकरी पालन कर रहा हॅू। लेकिन, इस व्यवसाय में लागत कम और मुनाफा ज्यादा है। जरूरत है वैज्ञानिक तौर-तरीके से पशुधन का प्रबंधन करने की। उन्होने बताया कि जमीन के नाम पर मेरे पास 2 बीघा जमीन है। इससे परिवार का गुजारा चलना संभव नहीं है। इसलिए साथ में टेंट हाउस का काम भी कर रहा हॅू। उन्होने बताया कि परम्परागत फसल में गेहूं और मक्का का उत्पादन लेता हॅू। इससे सालाना 40-50 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
बकरी से पौने दो लाख
उन्होंने बताया कि 10 बकरी के साथ बकरीपालन व्यवसाय शुरू किया। समय के साथ बकरियों का कुनबा भी बढ़ा और लाभ का आंकड़ा भी। उन्होंने बताया कि हैदराबादी और सोजत नस्ल की बकरियां और बकरे तैयार कर रहा हॅू। इससे सालाना डेढ़ से पौने दो लाख रूपए की आय मिल जाती है। गौरतलब है कि सालवी बकरियों से हुई कमाई से अपना मकान पक्का कर चुके है।
ईरानी अकरकरा की खेती
उन्होंने बताया कि कृषि गत आय बढाने के लिए इस साल आधा बीघा क्षेत्र में ईरान अकरकरा के पौधें लगाएं है। क्योंकि, इस फसल की बाजार मांग अच्छी है। साथ ही, भाव भी बेहत्तर रहते है। उन्होने बताया कि पौधें पर फूल खिलना शुरू हो चुके है। अब देखना यह है कि कितनी उपज और आय मिल पाती है