मोठ फसल में सूखा जड़ गलन रोग से बचाव के आसान उपाय
(सभी तस्वीरें- हलधर)मोठ में सूखा जड़ गलन रोग मृदा-बीज जनित कवक रोग है, जो मुख्यतः मैक्रोफेमिना फेजिओलीना नामक कवक के कारण होता है। इस रोग में पौधों की जड़ें सूखकर सड़ने लगती हैं, जिसके परिणामस्वरूप पत्तियाँ पीली पड़ना, पौधों का मुरझाना तथा अंततः पौधों की मृत्यु होने लगती है। संक्रमित जड़ों पर रोगजनक के छोटे, काले रंग के सूक्ष्म स्क्लेरोशिया दिखाई देते हैं। यह रोग विशेष रूप से उच्च तापमान और नमी की कमी (जल तनाव) की स्थिति में अधिक गंभीर होता है।
रोग के लक्षण
प्रारंभ में पौधों की निचली पत्तियाँ पीली पड़ती हैं और धीरे-धीरे मुरझाकर सूखने लगती हैं। संक्रमित पौधे कमजोर होकर आसानी से जमीन से उखड़ जाते हैं। जड़ों और कॉलर (भूमि की सतह के पास) वाले भाग में भूरा से काला रंग दिखाई देता है। जड़ों की छाल सड़कर रेशेदार छिलके जैसी अलग होने लगती है। जड़ और तने के संक्रमित भाग में असंख्य छोटे काले सूक्ष्म स्क्लेरोशिया दिखाई देते हैं, जिससे रोग को चारकोल रॉट भी कहा जाता है। अधिक संक्रमण होने पर पूरा पौधा सूखकर मर जाता है। खेत में रोगग्रस्त पौधे अक्सर छोटे-छोटे समूह के रूप में दिखाई देते हैं।
रोग का प्रबंध
बुवाई से पूर्व अनुशंसित कवकनाशी से बीजोपचार करें। टेबुकोनाजोल 50 प्रतिशत + ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
सुशीला चौधरी, सुनील कुमार शर्मा, डॉ. बीडीएस. नाथावत, कृषि महाविद्यालय, बीकानेर