टमाटर की खेती का वैज्ञानिक तरीका जानें, बीज से फसल तक पूरी जानकारी

नई दिल्ली 08-Oct-2026 05:25 PM

टमाटर की खेती का वैज्ञानिक तरीका जानें, बीज से फसल तक पूरी जानकारी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पोषण गुणों और विविध उपयोग के कारण टमाटर सबसे महत्वपूर्ण सब्जी फसल है। इसके फल बाजार में प्रायः सालभर उपलब्ध रहते हैं। यह एसिडिटी की शिकायत दूर करता है। टमाटर विटामिन ए, सी, पोटेशियम, खनिज और फाइबर का समृद्ध स्रोत है। यह सूप, सलाद, चटनी, सॉस और दूसरी सब्जियों के साथ मिलकर खाने में उपयोग किया जाता है।

  • जलवायु- 18–27 डिग्री सेल्सियस तापमान फसल वृद्धि के लिये। 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे तापमान पर टमाटर में लाल-पीला रंग बनना बंद हो जाता है। 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान पर भी लाल रंग बनना कम हो जाता है।
  • भूमि की तैयारी- हल्की रेतीली से दोमट मिट्टी उपयुक्त। अच्छी पैदावार के लिये मिट्टी का पीएच. मान 7 से 8.5 होना चाहिए। खेत को 3–4 बार जोतकर अच्छी तरह तैयार कर लें। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से अथवा देशी हल से करनी चाहिए। खेत को जुताई के बाद कांटा लगाकर समतल करके 250 से 300 क्विंटल. प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी गोबर की खाद को समान रूप से खेत में बिखेरकर पुनः अच्छी जुताई करें। और घास पात को पूर्ण रूप से निकाल देना चाहिए।
  • उन्नत किस्में- अर्का सौरभ, अर्का विकास, एआरटीएच-3, एआरटीएच-4, अविनाश-2, बीएसएस-90, को-3, एनएच.-101, एनएच.-102, एनएच-110, सिलेक्शन-12, हिसार अनमोल (एच-24), हिसार अरूण, हिसार लालिमा, हिसार ललित, कृष्णा, मंतरी, नवीन पूसा, केएस.-2, एनए.-601, पूसा-120, पंजाब छुआरा, पंत बहार, पूसा दिव्या, पूसा गौरव, पूसा हाइब्रिड-1, पूसा हाइब्रिड-2, पूसा हाइब्रिड-4, पूसा रूबी, पूसा शीतल, पूसा उपहार, रजनी, रश्मी, रत्न रोमा, रोमाली आदि।
  • बीज दर- 350–400 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर। संकर किस्मों के लिये 150 से 200 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर (नर्सरी)।
  • बुवाई का समय- जनवरी-फरवरी (ग्रीष्म ऋतु)।
  • नर्सरी में बीज की बुवाई- टमाटर के बीजों को सीधे खेत में न बोकर पहले नर्सरी में बोया जाता है। जब पौधे 4-5 सप्ताह अथवा 10 से 15 सेंटीमीटर के हो जावें तब इन्हें खेत में प्रतिरोपित करते हैं। टमाटर की पौध हेतु नर्सरी में 10 से 15 सेमी. उठी हुई क्यारियां बनानी चाहिए। क्यारियों की चौड़ाई 90 से 100 सेमी. तक ही होनी चाहिए। क्यारियों की लम्बाई 5 मीटर होनी चाहिए। एक एकड़ के लिये ऐसी 25 क्यारियों की आवश्यकता होती है। बीजों की बुवाई से पूर्व 8–10 ग्राम कार्बोफ्यूरान 3 जी. प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भूमि उपचार करें।
  • बीजोपचार: 2 ग्राम कैप्टान अथवा थायराम प्रति किलोग्राम बीज।
  • रोपाई: खेतों में रोपाई से पूर्व कार्बेंडानिज़म अथवा ट्राइकोडर्मा के घोल में पौधों की जड़ों को 20 से 25 मिनट उपचारित करने के बाद ही पौधों की रोपाई करें।
  • पौध से पौध की दूरी 75 सेंटीमीटर और कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर के फासले पर पौधों की रोपाई खेत में करनी चाहिए। मेड़ों के चारों तरफ गेंदा की रोपाई करें। फूल खिलने की अवस्था में भेदक कीट टमाटर की फसल में कम जबकि गेंदा के फूलों/कलियों में अधिक अन्डा देते हैं।
  • उर्वरक- 100 किग्रा नत्रजन, 80 किलो फास्फोरस, 60 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर। रोपाई से पूर्व मिट्टी में नत्रजन की एक तिहाई मात्रा का उपयोग करें। शेष मात्रा को दो भागों में बराबर बाँटकर रोपण से 25 से 30 दिन बाद और शेष मात्रा 40 से 45 दिन बाद टॉपड्रेसिंग के रूप में प्रयोग करें।


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