भिण्डी की खेती कैसे करें? वैज्ञानिक विधि से रिकॉर्ड उत्पादन

नई दिल्ली 02-Feb-2026 03:37 PM

भिण्डी की खेती कैसे करें? वैज्ञानिक विधि से रिकॉर्ड उत्पादन

(सभी तस्वीरें- हलधर)

भिण्ड़ी की खेती गर्मी और वर्षा ऋतु में की जाती है। इसके उत्पादन में भारत विश्व में प्रथम पायदान पर है। भिण्ड़ी के फ लों का उपयोग मुख्य रूप से सब्जी के रूप में किया जाता है, इसके अतिरिक्त केनिंग और फ ्रोजन के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसमें कई प्रकार के पौष्टिक तत्व और प्रोटीन मौजूद होते है। भिण्ड़ी में विटामिन ए, बी, सी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, केल्सियम, रेशा, तांबा, लोहा और मैंगेनेशियम प्रर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। भिण्ड़ी में उच्च रेशे पाये जाने के कारण शुगर की मात्रा नियंत्रण होती है। वहीं,आँतों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। भिण्ड़ी की खेती यदि वैज्ञानिक उन्नत तरीकों से की जाये तो कम समय व कम लागत में अच्छा मुनाफ ा कमाया जा सकता हैं। 

जलवायु: गर्म मौसम की आवश्यकता।  25-35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त

भूमि की तैयारी: पीएच मान 7-8.5। दो बार डिस्क प्लाउ से गहरी जुताई करने के बाद कल्टीवेटर से 2-3 जुताई कर, पाटा चलाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए। भूमि की जुताई से पहले 20-25 टन प्रति हैक्टयर अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए।

उन्नत किस्में: पूसा सावनी, पूसा मखमली, परभनी क्रान्ति, अर्का अनामिका, अर्का निकिता (एफ -1 हाइब्रीड), पंजाब पदमिनी,  पूसा-4, पंजाब-7, 8, हिसार। 

बीज दर: 20 किग्रा-ग्रीष्मकाल, 12 किग्रा. वर्षाकाल

बुवाई समय: फरवरी-मार्च (ग्रीष्मकाल), जून-जुलाई (वर्षाकाल)

बीजोपचार: बुवाई से पूर्व बीज को 12-15 घंटे पानी में भिगोकर1 घंटा छाया में सूखा लें। 1 ग्राम कार्बेण्डाजिम और 3 ग्राम थाइरम प्रति किलो बीज दर से बीजोपचार करें। 

कतार से कतार की दूरी: 30 सेमी.(ग्रीष्मकाल) , 45-60 सेमी(वर्षाकाल)

पौधे से पौधे की दूरी : 12-15 सेमी. (ग्रीष्मकाल), 30-45 सेमी (वर्षाकाल)

उर्वरक: 50 किलो नाइट्रोजन, 30 किलो फ ास्फोरस, 30 किलो पोटाश प्रति हैक्टयर अंतिम जुताई से पहले खेत में मिलावें। 50 किलो नाइट्रोजन बुवाई के 1 माह बाद खड़ी फसल में देना चाहिए।


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