गर्मी की सबसे फायदेमंद फसल: तर ककड़ी उत्पादन तकनीक
(सभी तस्वीरें- हलधर)तर ककड़ी जायद की एक प्रमुख फसल है। इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं जिनमें चिकनी त्वचा और सफेद गूदा होता है। इसको मुख्य रूप से नमक और काली मिर्च के साथ सलाद के रूप में कच्चा खाया जाता है। फल में शीतलन प्रभाव होता है इसलिए यह मुख्य रूप से गर्मी के मौसम में उगाई जाती है। यह एक नकदी फसल है।
मृदा-जलवायु: 6.0-7.5 पीएच मान। जीवांशयुक्त बलुई अथवा दोमट मिट्टी सर्वोत्तम। 20-22 डिग्री सेल्सियस तापक्रम पौधों की बढ़वार के लिए।
उन्नत किस्में: धार शीतल, पंजाब लोंग मेलन-1, पूसा उत्कर्ष।
खेत की तैयारी: तर ककड़ी की बुवाई के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और 2-3 जुताइयां कल्टीवेटर से करनी चाहिए। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा चलाकर मिट्टी को भुर-भुरा कर लेना चाहिए। उचित जल निकास के लिए खेत को समतल कर लेना चाहिए और आखिरी जुताई के समय ही खेत में 150-200 सड़ी गोबर की खाद को अच्छी प्रकार मिला देना चाहिए।
बीज दर: 1.0-1.2 किग्रा. बीज प्रति हेक्टेयर।
बीज उपचार: 2 ग्राम प्रति किग्रा बीज केप्टान।
बुवाई का समय: 15-25 फरवरी के मध्य।
बुवाई विधि: ड्रिप प्रणाली में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 2.0 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 50 सेमी रखनी चाहिए। एक ड्रिपर के पास 2-3 बीजों को 1-2 सेमी की गहराई पर बोना चाहिए। बुवाई के 15-20 दिन बाद प्रत्येक जगह 2 स्वस्थ पौधे छोड़कर बाकी पौधों को निकाल देना चाहिए।
पोषक तत्व प्रबंधन
खेत में 150-200 क्विंटल अच्छी प्रकार से सड़ी हुई गोबर की खाद डालना चाहिए। इसके अतिरिक्त उर्वरक के रूप में 50-60 किलोग्राम नत्रजन, 60-80 किलोग्राम फास्फोरस और 50-60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा, फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय देनी चाहिए। बची हुई नत्रजन की मात्रा दो बराबर भागों में टॉप ड्रेसिंग के रूप में जड़ के पास बुवाई के 20 और 40 दिन बाद देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त पौधों में लता बनने और पुष्पन के समय जल में घुलनशील एनपीके 19:19:19 की 8-10 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बूंद-बूंद सिंचाई के माध्यम से देने पर उपज में वृद्धि होती है। गुणवत्तायुक्त उपज प्राप्त करने के लिए पुष्पन व फलत के समय सूक्ष्म तत्वों का पर्णीय छिड़काव ($5 \times 6$ ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से) करना लाभदायक होता है।