पाले का खतरा: किसानों के लिए जरूरी बचाव तकनीक

नई दिल्ली 03-Jan-2026 04:06 PM

पाले का खतरा: किसानों के लिए जरूरी बचाव तकनीक

(सभी तस्वीरें- हलधर)

वायुमण्डलीय दशाओं को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि पाला गिरने वाला है अथवा नहीं। जब विशेष ठण्ड हो, दिन भर ठण्डी और तेज हवा चले और शाम को हवा चलना रुक जाये, रात्रि में आकाश साफ हो और वायुमण्डल में नमी की मात्रा कम हो। ऐसी परिस्थितियां उस रात में पाला गिरने की संभावना को बढ़ा देती हैं। पाला रात में विशेषतया 12 से 4 बजे के बीच पड़ता है।

पाले से बचाव के उपाय

  • धुआं करना: पाला पड़ने का पूर्वानुमान होने पर खेत की उत्तरी दिशा में अर्धरात्रि में सूखी घास-फूस, सूखी टहनियां, पुआल आदि को आग लगाकर धुआं कर फसलों को पाले से बचाया जा सकता है। धुआं करने से खेत में गर्मी बनी रहती है और फसलों के पौधों के चारों ओर तापमान में गिरावट नहीं आती है। आग इस प्रकार ढेरियाँ बनाकर लगाएं कि खेत में फसल के ऊपर धुएं की एक पतली परत बन सके।

  • सिंचाई करना: पाले का पूर्वानुमान होने पर खेत में हल्की सिंचाई देने से भूमि गर्म और नम बनी रहती है। सिंचाई देने से भूमि का तापमान 0.5 डिग्री सेल्सियस से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। यदि किसानों के पास फव्वारा सिंचाई की सुविधा हो, तो यह अधिक लाभदायक रहता है।

  • गंधक के तेजाब का प्रयोग: जिस दिन पाला गिरने की संभावना हो, फसलों पर गंधक के तेजाब (Sulphuric Acid) के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। 1 लीटर गंधक के तेजाब को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। इसका असर दो सप्ताह तक रहता है। छिड़काव के लिए केवल प्लास्टिक स्प्रेयर का ही उपयोग करें।

पौधशाला का प्रबंधन

पौधशाला में पौधे छोटी अवस्था में होते हैं, जिसके कारण कम तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इस कारण से नर्सरी में पाले से अधिक नुकसान होता है। नर्सरी के पौधों को पाला से बचाने के लिए पौधों को रात्रि के समय बोरी के टाट अथवा घास-फूस से ढक देवें। पौधों को ढकते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि पौधों का दक्षिण-पूर्वी भाग खुला रहे, ताकि पौधों को सुबह और दोपहर को धूप मिलती रहे। बोरी के टाट अथवा घासफूस का प्रयोग दिसंबर से फरवरी तक करें। मार्च महीने के प्रारंभ में इनके हटा दें। पौधशाला में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढक कर भी पाले से बचाया जा सकता है। ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। पौधशाला में छप्पर डालकर भी पौधों को बचाया जा सकता है। खेत में रोपित पौधों के थावलों के चारों ओर कडबी अथवा मूंज की टाटी बांधकर भी पौधों को पाले से बचाया जा सकता है।


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