रबी खाद्यान्न व मसाला फसलों में रोग-कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय

नई दिल्ली 03-Jan-2026 01:31 PM

रबी खाद्यान्न व मसाला फसलों में रोग-कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव के चलते रबी की खाद्यान्न और मसाला फसलों में रोग-कीट की संभावना भी बढ़ गई है। ऐसे में किसान भाई, बेहतर और स्वस्थ फसल उत्पादन के लिए समय-समय पर वैज्ञानिक तरीके से फसलों में रोग प्रबंधन करते रहें।

गेहूं
  • झुलसा, पत्ती धब्बा: नियंत्रण के लिए जाइनेब 78 डब्ल्यू पी ढाई किलो अथवा मैन्कोजेब 75 डब्ल्यू पी 2 किलो अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत 3 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर 3-4 छिड़काव करें।
  • रोली रोग: रोकथाम के लिए 25 किलो गंधक चूर्ण प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिन अंतराल पर 2-3 बार सुबह अथवा शाम के समय भुरकाव करें। या फिर, मैन्कोजेब 75 डब्ल्यू पी 2 किलो की दर से घोल का छिड़काव करें।

जौ
  • पीली रोली: रोग के लक्षण दिखाई देने पर टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ई.सी. 1 मिली प्रति लीटर पानी के घोल का 15 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें।
सरसों
  • झुलसा, काला धब्बा, पर्ण चित्ती: रोकथाम के लिए फसल की 45, 60 और 75 दिन अवस्था पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत अथवा मैन्कोजेब 50 डब्ल्यू पी अथवा आईप्रोडियान 50 डब्ल्यू पी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें।

  • सफेद रोली, मृदु रोमिल आसिता, तुलासिता रोग: फसल पर रोग के लक्षण दिखाई देते ही मैन्कोजेब 75 डब्ल्यू पी/ रिडोमिल एम जेड 72 डब्ल्यू पी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अंतराल पर करें। फसल की सिंचाई आवश्यकता से अधिक न करें।

  • चूर्णिल आसिता, छाछ्या रोग: रोग के लक्षण दिखाई देने पर घुलनशील गंधक 80 डब्ल्यू पी 0.2 प्रतिशत अथवा डाइनोकेप 48 ईसी 0.1 प्रतिशत के घोल का छिड़काव करें।

  • तनागलन रोग: रोग के लक्षण दिखाई देने पर कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यू पी 0.1 प्रतिशत का छिड़काव दो बार फूल आने के समय 20 दिन के अंतराल पर (बुवाई के 50वें और 70वें दिन पर) करें।

मसाला फसल
जीरा
  • झुलसा रोग: रोकथाम के लिए बुवाई के 30 से 35 दिन बाद फसल पर थायोफेनेट मिथाइल 70 डब्ल्यू.पी. अथवा मैन्कोजेब 75 डब्ल्यू.पी. के 0.2 प्रतिशत अथवा प्रोपेकोनाजोल 25 ईसी 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें।

  • छाछ्या: रोकथाम के लिए खड़ी फसल पर घुलनशील गंधक 80 डब्ल्यू पी 0.2 प्रतिशत अथवा डाइनोकेप 48 ईसी 0.1 प्रतिशत के घोल का छिड़काव करें।

मेथी
  • छाछ्या: रोकथाम के लिए गंधक का चूर्ण 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें अथवा डाइनोकेप 48 ईसी एक मिली प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें।

तुलासिता: रोकथाम के लिए मैन्कोजेब 75 डब्ल्यू पी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें।


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