अफीम की काली मस्सी: समय पर उपाय नहीं तो भारी नुकसान
(सभी तस्वीरें- हलधर)यह रोग फफूंद जनित है और अफीम का मुख्य रोग है। सर्वप्रथम बीज से आता है। इस रोग का प्रकोप पौध अवस्था से डोडा आने तक होता है। रोग के प्रथम संक्रमण में पत्तियां पीली पड़कर मुड़ जाती है, पौधे की बढ़वार रुक जाती है। पत्तियों पर काले धब्बे बनकर फैलते हैं। बाद में तना और डोडे भी सूखने लगते हैं। ऊपज में भारी कमी होती है।
रोकथाम : फसल पर रोग के लक्षण नजर आते हैं ही मेटालेक्सिल +मैन्कोजेब 0.2 ग्राम का प्रति लीटर पानी में घोल तैयार करके छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार 15 दिन के अन्तराल पर दोहरावें।