सोयाबीन में भृंग और इल्ली का प्रकोप, जानें नियंत्रण के सही तरीके
(सभी तस्वीरें- हलधर)सोयाबीन में लगभग 40 प्रतिशत प्रोटीन, 20 प्रतिशत तेल और औषधीय गुण पाये जाने के कारण यह एक चमत्कारिक फसल कही जाती है। यद्यपि यह एक दलहनी फसल है। लेकिन, हमारे देश में तेल की आवश्यकता को देखते हुये और सोयाबीन में तेल की प्रचुरता के कारण इसको तिलहन वर्ग में रखा गया है। देश मे कुपोषण को दूर करने के लिये सोयाबीन मिश्रण से आहार की पौष्टिकता को बढ़ाया जा सकता है। सोयाबीन से दूध, दही, मक्खन और पनीर बनाया जा सकता है। रासायनिक विश्लेषण के अनुसार इसका दूध गाय के दूध के समान माना जाता है। तेल निकालने के बाद इसकी खली में भी अच्छी मात्रा में प्रोटीन और खनिज लवण शेष रहते हैं। राजस्थान का सोयाबीन उत्पादन में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद तीसरा स्थान है। प्रदेश में सोयाबीन की खेती मुख्यतः दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्र में होती है। कोटा, झालावाड़, बारां और बूंदी जिलों में इसकी खेती व्यापक रूप से की जाती है। सोयाबीन की फसल पर कीट और रोग आक्रमण से 5 से 50 प्रतिशत तक पैदावार में कमी आ जाती है। अतः किसान समय रहते कीट प्रबंधन के उचित तरीके अपनाकर अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।
गर्डल बीटल
रासायनिक नियंत्रण के लिए डायमिथोएट 30 ईसी 1000 मिली. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। प्रकोप की तीव्रता अधिक होने पर थायोक्लोप्रिड 21.7 एससी. 750 मिली. प्रति हेक्टेयर की दर से 400-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
सेमी लूपर, ग्रीन सेमी लूपर
जैविक नियंत्रण में इल्लियों की शुरुआती अवस्था में बैसिलस थुरिजिएंसिस 1 लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। अथवा प्रोफेनोफॉस 50 ईसी. 1.25 लीटर अथवा क्यूनालफॉस 20 ईसी. 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर अथवा डाइफ्लूबेनजुरान 25 डब्ल्यूपी. 350 ग्राम अथवा इन्डोक्साकार्ब 15.8 ईसी. 0.3 लीटर अथवा क्लोरएन्ट्रानीलीप्रोल 18.5 एससी. 100 मिली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। बायोकीटनाशक (बी.टी.) 127 एससी. 3 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। सोयाबीन में कीटों के प्रकोप के नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी. 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर आर्थिक दृष्टि से सबसे उपयुक्त है।
तम्बाकू की इल्ली
प्रकाश पांश और फेरोमान पांश का प्रयोग करना चाहिए, ताकि वयस्क कीटों को नष्ट किया जा सके। अण्डों के गुच्छों को पत्तियों के सहित तोड़कर नष्ट कर देना चाहिये। नियंत्रण के लिये न्यूक्लियर पोली हैड्रोसिस वायरस (एन.पी.वी.) का प्रयोग करना चाहिए। अथवा फिर क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी. 1.5 लीटर अथवा इन्डोक्साकार्ब 14.8 ईसी. 300 मिली. अथवा इमामेक्टिन बेन्जोएट 5 एस.जी. 0.18 किग्रा अथवा क्लोरटैरेनीलीप्रोल 18.5 एससी. 100 मिली. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।
रोएंदार इल्ली
प्रकाश पांश एंव फेरोमान पांश का प्रयोग करना चाहिए, ताकि वयस्क कीटों को नष्ट किया जा सके। अण्डों के गुच्छों को पत्तियों के सहित तोड़कर नष्ट कर देना चाहिये। प्रथमावस्था सूंडी दिखाई देने पर एसओएनपीवी. की 250 एलई. प्रति हेक्टेयर की दर से 7-8 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण हेतु क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत डस्ट 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें। अथवा क्लोरोपायरिफ़ॉस 20 ई.सी. 1.5 लीटर अथवा प्रोफेनोफॉस 50 ईसी. 1.5 लीटर अथवा फ्लुबेंडाइएमाइड 39.35 एससी. 180 मिली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।