अब और ज्यादा सुर्ख हुआ सोजत मेहंदी का रंग
(सभी तस्वीरें- हलधर)पाली। काजरी के वैज्ञानिकों ने 10 वर्ष के प्रयासों से सोजत मेहंदी के रंग को अब और ज्यादा सुर्ख बना दिया है। काजरी अनुसंधान केंद्र ने मेहंदी के दो ऐसे पौधे विकसित किए हैं, जिनमें न केवल रंग अधिक गहरा है, बल्कि पत्तियों का उत्पादन भी सामान्य पौधों की तुलना में काफी अधिक है। इन पौधों में लासोन की मात्रा अधिक पाई गई है। यही वह तत्व है जो मेहंदी को रंग देता है। गौरतलब है कि केन्द्र के डॉ. नूर मोहम्मद, डॉ. डीके गुप्ता, डॉ. कीर्तिका, डॉ. पीके राय व डॉ. बीएल जांगिड मेहंदी पर शोध में जुटे हुए है।
1200 किलो तक उत्पादन
ैवैज्ञानिकों ने बताया कि नए पौधों की पत्तियों का उत्पादन भी प्रति हैक्टयर 1200 किलो से अधिक है। काजरी की ओर से मेहंदी का रंग अधिक गहरा करने और पत्तियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए 19 तरह के पौधे लेकर शोध किया गया। उन सभी पौधों की क्लोनल (पौधों की कटिंग), इवेल्यूएशन (वास्तिविक ग्रोथ) का सर्वे किया। इस पर दो पौधों में लोसन (मेहंदी में रंग) और पत्तियां अधिक मिली। उन पौधों में फूल भी देरी से आते हैं। ऐसे में पत्तियां अधिक समय तक भी रहती हैं।
किसानों को दिए जा रहे नए पौधे
वैज्ञानिकों ने बताया कि मैदानी परीक्षण के लिए सीजेड-आरएसपीएच- 8 (3594 किलो पत्तियां आती हैं प्रति हैक्टयर, लोसन कंटेंट 2.27 प्रतिशत) और सीजेड-आरएसपीएच-9 (2270 किलो पत्तियां आती हैं प्रति हैक्टयर, लोसन कंटेंट 2.33 प्रतिशत ) के पौधेें किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे है।
पाली जिले में करीब 35-40 हजार हैक्टेयर में मेहंदी होती है। इससे पाली जिले की पहचान है। शोध के बाद लोसन व पत्तियों में काफी इजाफा हुआ है।
डॉ अनिल कुमार शुक्ला, काजरी अनुसंधान अनुसंधान केंद्र, पाली