आबूरोड का तपोवन बनेगा प्राकृतिक खेती का उत्कृष्टता केंद्र

नई दिल्ली 26-Oct-2026 01:08 PM

आबूरोड का तपोवन बनेगा प्राकृतिक खेती का उत्कृष्टता केंद्र

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। राजस्थान में प्राकृतिक और योगिक खेती को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की तैयारी है। इसके लिए कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान की राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग के बीच तीन साल का एमओयू हुआ है। आबूरोड के शांतिवन परिसर में आयोजित ग्लोबल समिट में हुए इस समझौते के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक सिखाने के साथ गांव स्तर तक प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

इस पहल का बड़ा हिस्सा किसानों को खेत में इस्तेमाल होने वाली व्यावहारिक तकनीकों से जोड़ना होगा। प्रशिक्षण में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, स्थानीय संसाधनों से कृषि आदान तैयार करने, पानी बचाने, जलवायु अनुकूल खेती और टिकाऊ कृषि प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। सफल प्राकृतिक खेती मॉडल दिखाने के लिए किसानों के शैक्षणिक भ्रमण और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम भी होंगे।

तपोवन को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाने की तैयारी

समझौते में आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। आवश्यक सरकारी मंजूरियों के बाद यहां प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण, प्रदर्शन, अनुसंधान और ज्ञान-विनिमय की गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। किसानों और कृषि अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण तथा मॉडल प्रदर्शन भी प्रस्तावित हैं। केंद्र के स्वरूप, आधारभूत सुविधाओं और वित्तीय व्यवस्था के लिए अलग से स्वीकृतियां ली जाएंगी।

कृषि पर्यवेक्षकों से लेकर अधिकारियों तक को ट्रेनिंग

योजना सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगी। कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, कृषि पर्यवेक्षकों और फील्ड कार्मिकों को भी प्राकृतिक खेती की नई तकनीकों और प्रभावी कृषि प्रसार का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए मुख्य प्रशिक्षक (मास्टर ट्रेनर) तैयार होंगे, जो आगे जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर किसानों तथा कृषि कार्मिकों को प्रशिक्षित कर सकेंगे।

पहले चुनिंदा क्षेत्रों में शुरुआत, नतीजों के बाद विस्तार

प्राकृतिक खेती के लिए राज्य, संभाग, जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर संयुक्त जागरूकता अभियान चलाए जा सकेंगे। शुरुआती चरण में चुनिंदा जिलों या कृषि समूहों में गतिविधियां शुरू होंगी। वहां मिले परिणाम और अनुभव के आधार पर कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से दूसरे जिलों तक बढ़ाया जाएगा।

3 साल का करार, हर साल बनेगा एक्शन प्लान

एमओयू शुरुआती तौर पर तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा और आपसी सहमति से इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा। दोनों पक्ष नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे और हर साल संयुक्त कार्ययोजना तैयार होगी। कितने किसान और कृषि कार्मिक प्रशिक्षित हुए, कितने कार्यक्रम हुए और प्राकृतिक खेती अपनाने की प्रगति क्या रही—इसकी समय-समय पर समीक्षा होगी। वित्तीय दायित्व के लिए अलग से सरकारी स्वीकृति जरूरी होगी।

किसानों को क्या फायदा?

किसानों को स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल, मिट्टी की सेहत सुधारने, जल संरक्षण और टिकाऊ खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। सरकार का जोर रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के जरिए खेती को दीर्घकाल में अधिक टिकाऊ व लाभकारी बनाने पर है। समझौते के अवसर पर कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल, ब्रह्माकुमारी संस्थान के प्रतिनिधियों के साथ कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति वीरेन्द्र सिंह जैतावत और कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।


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