अमेरिका ट्रेड डील पर किसान सभा ने दी आंदोलन की चेतावनी 

नई दिल्ली 22-Oct-2026 04:44 PM

अमेरिका ट्रेड डील पर किसान सभा ने दी आंदोलन की चेतावनी 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है। संगठन ने केंद्र सरकार से कृषि और डेयरी क्षेत्र में अमेरिका को अतिरिक्त बाजार पहुंच देने वाले किसी भी समझौते को खारिज करने की मांग की है। किसान सभा ने चेतावनी दी है कि किसानों के हितों से समझौता हुआ तो देशभर में विरोध तेज किया जाएगा।

AIKS का कहना है कि अमेरिकी कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर सरकारी सहायता और सब्सिडी मिलती है। ऐसे में आयात शुल्क घटाकर या अन्य रियायतें देकर अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोला गया तो घरेलू किसानों के लिए कीमत के स्तर पर मुकाबला मुश्किल हो सकता है | 

सोयाबीन उत्पादक राज्यों को लेकर चिंता

किसान सभा ने खास तौर पर सोयाबीन किसानों का मुद्दा उठाया है। संगठन के अनुसार, सोयाबीन और इससे जुड़े उत्पादों के आयात में रियायत मिलने से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों पर असर पड़ सकता है। सस्ता आयात बढ़ने की स्थिति में घरेलू मंडियों में सोयाबीन के भाव पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

संगठन ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती को भी किसान हितों के खिलाफ बताया है। AIKS का आरोप है कि सोयाबीन की कटाई के समय आयात सस्ता होने से घरेलू उपज की कीमतों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। डेयरी बाजार खुला तो दूध उत्पादकों पर दबाव AIKS ने डेयरी क्षेत्र को लेकर भी सरकार को आगाह किया है। किसान सभा का कहना है कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक रियायत मिली तो छोटे और सीमांत पशुपालकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद कीमतों पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।

संगठन ने दावा किया कि प्रस्तावित व्यापार व्यवस्था का असर केवल सोयाबीन और डेयरी तक सीमित नहीं रहेगा। मक्का, ज्वार और कपास के साथ बादाम, अखरोट तथा सेब उत्पादक किसानों को भी विदेशी उत्पादों से बढ़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। संसद में जानकारी रखने की मांग किसान सभा ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में पारदर्शिता का सवाल भी उठाया है। संगठन का आरोप है कि बातचीत और कृषि से जुड़े संभावित प्रावधानों की पर्याप्त जानकारी संसद के सामने नहीं रखी गई है। AIKS ने सरकार से किसान हितों को प्राथमिकता देने और कृषि एवं डेयरी बाजार को प्रभावित करने वाली रियायतों से पीछे हटने की मांग की है ।


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