बारिश के बाद तपन की मार झेलेंगी फसलें
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश में गर्मी प्रचंड़ रूप लेने लगेगी। इससे दिन के समय सड़कें खाली नज़र आने लगी हैं। साथ ही, जायद के साथ-साथ नरमा की बुवाई पर भी संकट नजर आने लगा है। प्रदेश के पश्चिमी जिलों में ताल-तलैया का पानी सूख जाने से पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना किसानों पर भारी पडऩे लगा है। गौरतलब है कि होली के बाद से पारे ने छलांग मारना शुरू कर दिया था। मौसम विभाग के मुताबिक चालू माह में तापमान और बढ़ेंगे। हालांकि, प्रदेश में एक के बाद एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम अपना मिजाज बदल गया है। कई जिलों में बूंदा-बांदी के साथ तेज हवाएं चल रही हैं। इससे तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज हुई है। लेकिन, विक्षोभ का असर समाप्त होने के साथ ही तापमान में फिर से बढौत्तरी देखने को मिलेगी। ऐसे में जायद सब्जी फसलों के साथ-साथ मूंगफली, मूंग, बाजरा और चारा फसलों की बुवाई करने वाले किसानों पर सिंचाई की मार पड़ सकती है। वहीं, अपेक्षित उत्पादन से भी हाथ धोना पड़ सकता है। पशुधन में दुग्ध उत्पादन की दर में कमी आती है। ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। आपको बता दें कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिन का तापमान 35 से 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज हो रहा है। मौसम विभाग ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि चालू माह में उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में तेज गर्मी का असर देखने को मिलेगा। दिन-रात के तापमान में बढौत्तरी होगी।
शाम को करें फसलों की थ्रेसिंग
प्रदेश के अधिकांश जिलों में रबी फसलों की कटाई संपन्न हो चुकी है। पश्चिमी जिलों में इन दिनों किसान खेत में पसरी फसलों को एक जगह एकत्रित करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में चढ़ते पारे को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने की जरूरत है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान सुबह-शाम के समय फसलों को एकत्र करने का कार्य करें। ताकि, तेज गर्मी से बचा जा सके। ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ का उपयोग करें। ताकि, शरीर में पानी की कमी नहीं हो। फसलों की थ्रेसिंग शाम को 5 बजे के बाद ही शुरू करें।
मेटाबॉलिक रेट बढने का डर
गर्मियों में पशुओं की मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाता है। वहीं, एनर्जी लॉस शुरू हो जाता है। ऐसे में दूध का उत्पादन जानवर की ऊर्जा पर निर्भर करता है। पशु जितनी ऊर्जा बचाएंगे, उतनी ही उत्पादन क्षमता बनी रहेगी। ऐसे में पशुओं की वैज्ञानिक तरीके से सारसंभाल जरूरी है। ताकि दूध उत्पादन में कमी न आए। पशु विशेषज्ञों डॉ. रावताराम के मुताबिक पौष्टिक आहार और पानी के साथ यूरिया उपचारित भूसा देकर उत्पादन समान बनाए रखा जा सकता है। गर्मी में जरूरी होता है कि दुधारू पशुओं को तेज धूप से बचाएं।
कटी फसल और भूसे को नुकसान
वर्तमान में खेतों में कटाई का काम जोर-शोर से चल रहा था। कई किसानों ने अपनी मेहनत की फसल काटकर खेतों में ही सुखाने के लिए छोड़ रखी थी। लेकिन अचानक हुई बारिश की वजह से रबी फसलें पानी में डूब गईं। किसानों का कहना है कि न केवल मुख्य फसल, बल्कि पशुओं के चारे (तूड़ी) पर भी पानी फिर गया है। भीगने के कारण अब दाने की चमक कम हो जाएगी, जिससे बाजार में किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।