बीटी कपास में गुलाबी सुण्डी का होगा अंत 

नई दिल्ली 08-Apr-2026 01:58 PM

बीटी कपास में गुलाबी सुण्डी का होगा अंत 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बीटी कपास में गुलाबी सुण्डी प्रबन्धन पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजन किया गया इस कार्यशाला में कृषि अधिकारियों, प्रगतिशील कृषकों व जीनिंग मील मालिकों, कृषि आदान विक्रेता, सीड्स कम्पनी प्रतिनिधियों  सहित कृषि वैज्ञानिको और  विशेष्यज्ञों ने चर्चा की गुलाबी  सुंडी के प्रकोप और कृषि क्षेत्र की चुनोतियो का  समाधान निकाला 

कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेष्यज्ञों का चिंतन 
राज्य सरकार के निर्देशानुसार बीटी कॉटन में लगने वाले गुलाबी सुंडी रोग से बचाव के , प्रकोप पर   निगरानी, नियंत्रण के संबंध में जानकारी दिए जाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा कपास फसल में गुलाबी सुण्डी कीट के प्रबन्धन के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला आत्मा सभागार कृषि भवन बीकानेर में आयोजित की गई।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस प्रकार की कार्यशालाएं उत्तरोत्तर ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम के रूप में आयोजित की जानी हैं। 
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि गत कुछ वर्षों से कृषि विभाग द्वारा इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक रूप से किया जा रहा है, जिससे गुलाबी सुण्डी पर  प्रभावी नियंत्रण हुआ है  इसी का परिणाम रहा कि जिले में बीटी कपास का क्षेत्रफल व उत्पादन बढ़ा है।

संयुक्त निदेशक (कृषि) मदनलाल ने बताया कि कॉटन की बुवाई से पूर्व कॉटन जिनिंग मिलों के मालिक तथा किसान बीटी कॉटन के अवशेष प्रबंधन के लिए जिनिंग उपरान्त अवशेष सामग्री को नष्ट किया जाना नितांत आवश्यक था जिससे समुचित रूप से कीट का प्रबंधन किया जा सकें। उन्होंने कहा की  किसान बीटी कॉटन की लकड़ियों का प्रबंधन सही तरीके से करें, ताकि गुलाबी सुण्डी के प्रकोप को शुरूआती अवस्था में ही रोका जा सके। इस अवसर पर कृषकों को गुलाबी सुण्डी के प्रबन्धन विषय पर निःशुल्क पम्पलैट व साहित्य वितरण के साथ ही प्रभावी मोनिटरिंग हेतु फेरोमोन ट्रैप वितरण किया गया।

विशेष्यज्ञों ने दिया समाधान 

परियोजना निदेशक (आत्मा) बीएल डाबला ने बीटी कपास की फसल की पैकेज आफ प्रैक्टिसेज से किसानों को अवगत कराया।इसी  के साथ  स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिक डॉ वी एस आचार्य ने बीटी कपास में कीट व्याधि नियंत्रण पर प्रकाश डाला तथा किसानों से कपास फसल में सिंचाई व उर्वरक प्रबंधन पर  विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में विषय विशेष्यज्ञों ने गुलाबी सुण्डी के कॉटन की फसल को होने वाले नुकसान एवं कीट के जीवन चक्र की विभिन्न अवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भण्डारित कपास को ढक कर रखें, जिससे गुलाबी सुण्डी के पतंगे खेतों में फसल पर अण्डे नही दे सकेंगे। 

जिले में जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान के कारण नमी के कम होने से व जिनिंग मिलों में रेशों एवं बिनौला निकाले के लिए लाये गये कच्चे कपास से गुलाबी सुंडी का प्रभाव अधिक होता है। इसलिए जिनिंग मिल मालिकों द्वारा कपास की अवशेष सामग्री को समय पर नष्ट किया जाना आवश्यक है। सीड्स कम्पनी प्रतिनिधि ने  बताया की किसान एवं जिनिंग मिल मालिक अपने  खेतों तथा जिनिंग मिलों के आस-पास फैरोमेन ट्रैप व पतंगे ट्रैप लगाकर कीट के प्रभाव की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


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