विकसित भारत के लिए मानव पूंजी मजबूत करने पर जोर
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन से निकले 28 प्रमुख कार्य बिंदुओं पर काम कर रही नौ समितियों की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक की अध्यक्षता आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने की।
नौ समितियां उच्च शिक्षा, कौशल, नवाचार और क्षमता निर्माण के जरिए विकसित भारत के लिए मजबूत मानव पूंजी तैयार करने से जुड़े कार्य बिंदुओं पर काम कर रही हैं। बैठक का उद्देश्य समितियों की प्रगति का आकलन कर समयबद्ध और ठोस सिफारिशों को अंतिम रूप देना रहा।
डॉ. एमएल. जाट ने कहा कि सिफारिशें साक्ष्य आधारित, मापन योग्य और क्रियान्वयन योग्य होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित आंकड़ों, दस्तावेजी साक्ष्यों और सफल प्रयोगों को आधार बनाकर ऐसी अनुशंसाएं तैयार करने पर जोर दिया, जिनके परिणामों का प्रभावी तरीके से आकलन किया जा सके।
आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने समितियों के बीच समन्वय और निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सम्मेलन में हुई चर्चाओं को ठोस एवं क्रियान्वयन योग्य परिणामों में बदलने के लिए संरचित कार्ययोजना पर जोर दिया।
बैठक में नौ समितियों के सदस्य सचिवों ने अपने-अपने कार्य बिंदुओं पर प्रगति प्रस्तुत की। प्रस्तुतियों में उपलब्धियां, अब तक की प्रगति, कमियां और प्रस्तावित अनुशंसाएं शामिल रहीं। चर्चा के दौरान आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर सिफारिशों को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। बैठक के समापन पर समितियों को समयबद्ध तरीके से साक्ष्य आधारित, मापन योग्य और क्रियान्वयन योग्य अनुशंसाएं प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया, ताकि उन पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर पाठ्यक्रम विकास की समीक्षा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के लिए विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों के विकास और डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम तैयार कर निर्धारित समयसीमा में अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने आईसीएआर कर्मचारियों को नियमित रूप से कम से कम दो घंटे का ऑनलाइन शिक्षण पूरा करने और मिशन कर्मयोगी में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।