अन्नदाता अब बनेगा 'ऊर्जादाता',पेट्रोल की जगह इथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां

नई दिल्ली 30-Apr-2026 01:50 PM

अन्नदाता अब बनेगा 'ऊर्जादाता',पेट्रोल की जगह इथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां

(सभी तस्वीरें- हलधर)

केंद्र सरकार देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़े बदलाव की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के दायरे को बढ़ाकर E85 और E100 तक ले जाने का प्रस्ताव रखा गया है।

इस पहल से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि गन्‍ना, मक्का और चावल की खेती करने वाले किसानों को एक विशाल नया बाजार मिलेगा।

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन की मुख्य बातें

मंत्रालय द्वारा 27 अप्रैल को जारी इस प्रस्ताव का उद्देश्य इमीशन (उत्सर्जन) नियमों और फ्यूल क्लासिफिकेशन के तकनीकी मानकों को अपडेट करना है। वर्तमान में इसे सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया है जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

नए फ्यूल स्टैंडर्ड- सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन कर E85 (85% इथेनॉल) और E100 (शुद्ध इथेनॉल) को आधिकारिक कैटेगरी में शामिल किया जाएगा।

पेट्रोल की नई पहचान- पेट्रोल की मानक पहचान को E10 से बदलकर अब E10/E20 किया जाएगा।

बायोडीजल का विस्तार- बायोडीजल की सीमा को भी B10 से बढ़ाकर B100 तक अपडेट करने का प्रस्ताव है।

भार क्षमता में बदलाव- कमर्शियल वाहनों के लिए ग्रॉस व्हीकल वेट लिमिट को 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम करने का सुझाव दिया गया है।

किसानों की बदलेगी किस्मत: ₹42,000 करोड़ का हुआ लाभ

इथेनॉल उत्पादन के लिए अब सरकार केवल गन्ने और मक्के तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चावल का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इथेनॉल नीति से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के मक्का किसानों को सीधा लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि, इथेनॉल उत्पादन की वजह से अब तक किसानों की जेब में लगभग 42,000 करोड़ रुपये पहुँचे हैं। पहले मक्का की कीमतें MSP से कम रहती थीं, लेकिन अब मांग बढ़ने से खेती का रकबा और किसानों की आय दोनों में सुधार हुआ है।

अगला कदम: फ्लेक्स-फ्यूल इंजन और विदेशी मुद्रा की बचत

भारत ने पहले ही E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिससे हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल पेट्रोल के आयात की बचत हो रही है। अब सरकार का फोकस E85 और E100 पर है।


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