उत्पादन से बाजार तक वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर
(सभी तस्वीरें- हलधर)कोटा। कृषि विश्वविद्यालय, कोटा और ICAR-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय समन्वित आलू अनुसंधान परियोजना की दो दिवसीय 44वीं वार्षिक समूह बैठक का शुभारंभ हुआ। बैठक में देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों से आए करीब 75 वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ आलू अनुसंधान, उत्पादन तकनीक और किसानों तक नवीन तकनीकों के हस्तांतरण पर मंथन कर रहे हैं।
किसानों को बाजार से सीधे जोड़ने की जरूरत
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलगुरु डॉ. निमित रंजन चौधरी ने आलू उत्पादन व्यवस्था को वैल्यू चेन से सप्लाई चेन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आलू को केवल खाद्य फसल के बजाय व्यवसायिक एवं मूल्य संवर्धित कृषि मॉडल के रूप में विकसित करने की जरूरत है। किसानों को प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है।
समन्वित प्रयासों से चुनौतियों का समाधान
कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने कहा कि आलू अनुसंधान की मौजूदा चुनौतियों का समाधान किसी एक संस्थान के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों, उद्योगों और किसानों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने उत्पादकता, गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पोषण, जलवायु अनुकूलता, डिजिटल तकनीक और बाजार को जोड़कर अनुसंधान करने पर जोर दिया।
एआई तकनीक पर फोकस
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने पछेती झुलसा रोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास, गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता और प्रसंस्करण पर अनुसंधान की आवश्यकता बताई। उन्होंने आलू में रोग एवं कीटों की शीघ्र पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के उपयोग के साथ जलवायु-सहिष्णु उत्पादन तकनीक और पोषण संबंधी अनुसंधान को महत्वपूर्ण बताया।
बदलती जरूरतों के अनुरूप बढ़ा अनुसंधान का दायरा
ICAR-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के निदेशक डॉ. बृजेश सिंह ने भारत में आलू अनुसंधान की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में उत्पादकता, किस्म विकास, गुणवत्तापूर्ण बीज तथा रोग-कीट प्रबंधन पर जोर था। अब अनुसंधान का दायरा जलवायु परिवर्तन, प्रसंस्करण, पोषण, जैव-प्रौद्योगिकी और बाजार की जरूरतों तक बढ़ गया है।
17 परियोजना केंद्रों के वैज्ञानिक ले रहे हिस्सा
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मुकेश चन्द गोयल ने बताया कि बैठक में विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों, ICAR-CPRI के 17 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना केंद्रों तथा पटना, ग्वालियर और मोदीपुरम के क्षेत्रीय केंद्रों के वैज्ञानिक शामिल हैं। तकनीकी सत्रों में फसल सुधार, उत्पादन और फसल संरक्षण से जुड़े अनुसंधान कार्यों एवं उनके परिणामों पर चर्चा की जा रही है।
वार्षिक प्रतिवेदन और प्रकाशनों का विमोचन
उद्घाटन अवसर पर आलू अनुसंधान परियोजना के वार्षिक प्रतिवेदन तथा कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के आलू संबंधी प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही आलू अनुसंधान में योगदान के लिए ICAR-CPRI के पूर्व निदेशक डॉ. बीरपाल सिंह, ICAR-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. पी.एस. नायक और कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के पूर्व आलू परियोजना प्रभारी डॉ. आर.बी. सिंह को सम्मानित किया गया।