कृषि स्टैक: योजनाओं में अनिवार्य होगी फार्मर आई डी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर| मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित कृषि स्टैक राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक में कृषि स्टैक की प्रगति, किसान रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे, उर्वरक वितरण व्यवस्था और किसान कल्याण योजनाओं के डिजिटलीकरण की समीक्षा की गई। बैठक में कृषि योजनाओं के लिए फार्मर आईडी लागू करने और किसान सम्मान निधि योजना का जिम्मा क़ृषि विभाग को सौंपे जाने के संकेत दिए गए!
बैठक में प्रमुख शासन सचिव, कृषि मंजू राजपाल ने बताया कि अब तक 87.44 लाख किसानों का किसान रजिस्ट्री में पंजीकरण पूरा हो चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है। इनमें 49.46 लाख किसान पीएम-किसान रजिस्ट्री से जुड़ चुके है! कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि कृषि विभाग की योजनाओं में किसान आईडी को अनिवार्य करने के निर्देश मुख्य सचिव ने दिए है!
बनेगा कृषि स्टैक आयुक्तालय
कृषि स्टैक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग के अधीन कृषि स्टैक आयुक्तालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। कृषि आयुक्त को कृषि स्टैक आयुक्त का दायित्व सौंपा जाएगा। इससे कृषि स्टैक से जुड़े विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म, किसान रजिस्ट्री, डेटा एकीकरण और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन को एकीकृत दिशा मिलेगी।
सम्मान निधि हस्तांतरित करने की तैयार
बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को सहकारिता विभाग से कृषि विभाग में स्थानांतरित करने के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। वहीं मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 26वीं किस्त से किसान आईडी को अनिवार्य किए जाने की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।
आरओआर और किसान रजिस्ट्री का होगा डेटा सिंक्रनाइजेशन
राज्य के RoR (Record of Rights) सिस्टम और किसान रजिस्ट्री के बीच डेटा सिंक्रनाइजेशन का कार्य 31 अगस्त तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद निरंतर डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित की जाएगी तथा आरओआर सत्यापन मॉड्यूल लागू किया जाएगा। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को म्यूटेशन प्रक्रिया में आवेदक का आधार नंबर और किसान आईडी अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी समय-सीमा 15 सितंबर निर्धारित की गई है।
एफएफएस पूरे प्रदेश में
फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (FFS) के सफल पायलट के बाद इसे अगस्त 2026 में पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी।
दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट
किसान रजिस्ट्री को खाद्य विभाग और राजफेड की एमएसपी खरीद प्रणाली के आधार पर एकीकृत किया जाएगा। वर्तमान खरीद सीजन में दो जिलों में इसका पायलट शुरू किया जाएगा।
नवंबर से चलेगा अभियान
कम प्रदर्शन वाले जिलों और अधिक अनक्लेम्ड बकेट वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए नवंबर से राज्यव्यापी सैचुरेशन अभियान चलाया जाएगा। शेष 600 ऑफलाइन गांवों को 15 सितंबर तक ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा गया है।
सैटेलाइट और एआई तकनीक का उपयोग
सैटेलाइट डेटा के माध्यम से रबी सीजन में लगभग 75 लाख परती भूमि के खसरे चिन्हित किए गए, जिससे करीब 7.5 करोड़ रुपए की बचत हुई। वहीं एआई आधारित फोटो वैलिडेशन के माध्यम से डिजिटल सर्वे की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार हुआ है।
किसानों तक पहुंचेगी डिजिटल जानकारी
कृषि स्टैक और किसान रजिस्ट्री के संबंध में किसानों को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया एजेंसी नियुक्त कर व्यापक आईईसी अभियान चलाया जाएगा। नई उर्वरक वितरण प्रणाली से संबंधित 665 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन में से 100 करोड़ रुपए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कृषि स्टैक के उपयोग के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में आवंटित करने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाएगा