किसानो की बढी टेंशन, लौटने को तैयार मानसून
(सभी तस्वीरें- हलधर)उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम में एक अहम बदलाव दिखाई दे रहा है. नमी वाली मॉनसूनी हवाओं की जगह अब सूखी उत्तर-पश्चिमी हवाएं आगे बढ़ रही हैं. इससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और आसपास के इलाकों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां काफी कम होने का अनुमान है. सूखी हवाओं के असर से वातावरण में नमी का स्तर कम हो सकता है. इससे पिछले कुछ हफ्तों से बनी चिपचिपी गर्मी और उमस से लोगों को कुछ राहत मिलने की संभावना है. हालांकि, नमी घटने के साथ बादलों के बनने की प्रक्रिया भी कमजोर होगी, जिससे उत्तर, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से में बारिश प्रभावित हो सकती है. सैटेलाइट तस्वीरों और वेदर मॉडल के संकेतों के अनुसार, मॉनसून ट्रफ अब हिमालय की तलहटी के करीब पहुंच गया है. मॉनसून ट्रफ की यह स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में कमजोर बारिश से जुड़ी मानी जाती है. आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में बदलाव के लिए बंगाल की खाड़ी में नया लो प्रेशर सिस्टम का बनना अहम होगा. अगर ऐसा सिस्टम देश के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ता है या मॉनसून ट्रफ दोबारा दक्षिण की ओर खिसकता है तो उत्तर और पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं. फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं बनने पर बारिश कमजोर रहने की संभावना है.
बारिश की कमी से खेती पर असर की चिंता
मॉनसून की कुल बारिश में कमी कृषि के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में मौसमी बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है. इन इलाकों में बारिश की कमी से फसलों की स्थिति और मिट्टी में नमी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है.
बदलाव के दौर में मौसम
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मॉनसून अभी तत्काल समाप्त नहीं हो रहा है, लेकिन वातावरण में इसके कमजोर पड़ने और बदलाव की शुरुआती स्थिति जरूर दिखाई दे रही है. उत्तर और पश्चिम भारत में बारिश की दोबारा वापसी काफी हद तक बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई निम्न दबाव प्रणालियों और उनके जरिए देश के अंदर नमी पहुंचने पर निर्भर करेगी.