पराली के नाम पर किसानों को खलनायक बनाना उचित नहीं
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना और उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करना उचित नहीं है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसानों को दोषी ठहराने के बजाय उनसे संवाद कर समस्या का समाधान निकालने की जरूरत है। चौहान ने बताया कि वर्ष 2019-20 में प्रदूषण में पराली का योगदान करीब 7 प्रतिशत था, जो अब घटकर लगभग 2.5 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ने और लगातार संवाद के कारण पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के प्रयास किए गए हैं। इसके बावजूद प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार बताना सही नहीं है।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को रेड जोन में डालने और सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सहयोग और आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। पराली प्रबंधन के लिए किसानों को तकनीकी सहायता और संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि वे फसल अवशेषों का बेहतर उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय किसानों के मान-सम्मान और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
इस दौरान मंत्री ने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार की खरीद व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पीएम-आशा योजना के तहत यदि दलहन और तिलहन की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे जाती हैं, तो केंद्र की नोडल एजेंसियां नेफेड और एनसीसीएफ राज्यों की प्रतीक्षा किए बिना सीधे मंडियों में खरीद शुरू कर सकेंगी। इससे किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने से बचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को मौसम, बाजार और उत्पादन संबंधी जोखिमों से राहत देना है। इसके लिए प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में सहायता, फसल बीमा का विस्तार और कृषि तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।