फार्मर आईडी के इंतजार में सैकड़ों किसान, नहीं पहुंचा प्रशासन
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश के फलौदी, कोटपूतली बहरोड़, पाली, जोधपुर और अजमेर जिलें के अधिकांश किसानों अब भी अपनी फार्मर आईडी का इंतजार कर रहे है। क्योंकि, प्रशासन ने घर-घर दस्तक नहीं दी है। इस कारण यह जिलें भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एग्रिस्टैक (फार्मर रजिस्ट्री) में पिछड़े साबित हो रहे है। जबकि, बीकानेर, बासंवाड़ा, करौली, टोंक और धौलपुर जिला टॉप फाइव में काबिज हो चुके है। बता दें कि अब तक प्रदेश में 81 लाख से ज्यादा किसानों को 11 यूनिक अंको की आईडी प्राप्त हो चुकी है। प्रदेश में 90 लाख से ज्यादा पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ पा रहे है। जबकि, पंजीयन 84 लाख किसान ही है।
जानिए, यह है फार्मर रजिस्ट्री
फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को 11 अंकों की एक यूनिक डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई जाती है, जिसे किसान आईडी कहा जाता है। इस डिजिटल पहचान में किसान के जनसांख्यिकीय विवरण, स्वामित्व वाली भूमि तथा बोई गई फसलों से संबंधित समग्र और उपयोगी जानकारी दर्ज रहती है, जिससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
बिचौलिएं का खेल खत्म
फार्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य केंद्र- राज्य सरकार की कृषक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिये के किसानों तक पहुंचाना है। इसके माध्यम से पीएम किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल ऋण, फसल बीमा, एमएसपी आधारित खरीद, कृषि अनुदान योजनाएं तथा आपदा मुआवजा जैसी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना आसान होगा। एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में फार्मर रजिस्ट्री तैयार की जा रही है और राजस्थान में यह किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।
हर किसान है पात्र
सभी प्रकार के किसान—सीमांत, लघु और बड़े किसान—इस योजना के अंतर्गत पात्र हैं। महिला भूमिधारकों का भी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण किया जा रहा है। प्रत्येक भूमि स्वामी किसान की फार्मर आईडी बनाई जाती है। भूमि स्वामित्व के आधार पर पंजीकरण किया जाता है, हालांकि किराए पर खेती करने वाले किसानों के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में अपवाद संभव हैं।
आधार कार्ड जरूरी
पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, नवीनतम खसरा या जमाबंदी की प्रति तथा आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर आवश्यक है। पैन कार्ड की आवश्यकता नहीं है। आधार और जमाबंदी में नाम मिलान नहीं होने की स्थिति में भी पंजीकरण संभव है, जिसे गिरदावर और तहसीलदार के माध्यम से सत्यापित किया जाता है। भविष्य में योजनाओं के निर्बाध लाभ के लिए आधार कार्ड में नाम की शुद्धता आवश्यक होगी।
एक मोबाइल नंबर पर दो किसान
भारत सरकार के निर्देशानुसार एक मोबाइल नंबर से दो किसानों का पंजीकरण किया जा सकता है। राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर शिविरों के माध्यम से फार्मर रजिस्ट्री का पंजीकरण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूर्णतया ऑनलाइन है, नि:शुल्क है और औसतन 10 से 15 मिनट में पूर्ण हो जाती है। विवाहित महिलाएं अथवा अन्य स्थानों पर निवास करने वाले किसान अपने परिजनों के माध्यम से ओटीपी साझा कर पंजीकरण करवा सकते हैं। फार्मर रजिस्ट्री एक बार बनवानी होती है, इसके बाद उत्तराधिकार या भूमि क्रय-विक्रय की स्थिति में विवरण स्वत: अद्यतन हो जाता है। प्रत्येक किसान का अलग-अलग पंजीकरण आवश्यक है।
आईडी से मिलेगा लाभ
फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण ई-मित्र, सीएससी केंद्र, ग्राम पंचायत अथवा तहसील कार्यालय के माध्यम से कराया जा सकता है। पीएम किसान योजना में नए पंजीकरण एवं पीएम फसल बीमा योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है। निकट भविष्य में कृषि और सहकारिता विभाग की सभी किसान केंद्रित योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए फार्मर आईडी आवश्यक होगी।