गांव की पगडंडी से विकसित भारत तक, अब सड़क में भी चाहिए गुणवत्ता

नई दिल्ली 05-Oct-2026 05:46 PM

गांव की पगडंडी से विकसित भारत तक, अब सड़क में भी चाहिए गुणवत्ता

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कामकाज में तेजी और गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चिंतन शिविर केवल औपचारिक ‘कर्मकांड’ बनकर न रह जाए, बल्कि यहां से निकलने वाले फैसले गांवों की सड़कों पर दिखाई देने चाहिए। पीएमजीएसवाई के अगले चरण का लक्ष्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि ‘क्वालिटी कनेक्टिविटी’ उपलब्ध कराना होना चाहिए।

भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि गांव मजबूत होंगे तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने अपने बचपन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि गांव से भोपाल पढ़ने जाने के लिए उन्हें 13 किलोमीटर का रास्ता पगडंडियों और कीचड़ के बीच तय करना पड़ता था। सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को खटिया पर ले जाने की पीड़ा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों का निर्माण केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का काम नहीं, बल्कि लोगों के जीवन से जुड़ा विषय है।

8.50 लाख किमी सड़क नेटवर्क तैयार

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए चौहान ने कहा कि पीएमजीएसवाई ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश में अब तक करीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई जा चुकी हैं। पीएमजीएसवाई-4 के तहत 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से 20 हजार किलोमीटर को मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने सभी स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

72 दिन की समय सीमा पर सख्ती

परियोजनाओं में देरी को लेकर मंत्री ने राज्यों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वीकृति से निर्माण शुरू होने तक अधिकतम 72 दिन की समय-सीमा निर्धारित है। इसका उल्लंघन करने वाले राज्यों का पूरा हिसाब तैयार किया जाए। बार-बार टेंडर रद्द होने या बोली नहीं आने जैसी समस्याओं का समाधान टेंडर जारी करने से पहले ही ‘प्री-टेंडर प्लानिंग’ के जरिए किया जाए।

‘चिट्ठियों’ से नहीं, फॉलोअप से होगा समाधान

फॉरेस्ट क्लीयरेंस के मामलों में देरी पर चौहान ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल एक के बाद एक चिट्ठियां लिखने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने अधिकारियों से पर्यावरण विभाग और जिला कलेक्टरों के साथ सीधे समन्वय कर लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने को कहा। उनका संदेश साफ था—काम को गति देने के लिए व्यक्तिगत फॉलोअप जरूरी है।

हर इलाके की जरूरत के हिसाब से बने डीपीआर

बाढ़, अतिवृष्टि और भूस्खलन जैसी चुनौतियों का जिक्र करते हुए चौहान ने कहा कि देश के हर हिस्से में एक जैसा सड़क निर्माण मॉडल लागू नहीं किया जा सकता। डीपीआर तैयार करते समय स्थानीय ढलान, जल निकासी, पुलिया और जलभराव का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। सड़क बनने के बाद पानी की निकासी नहीं होने से यदि ग्रामीणों के घरों में पानी भर जाए तो ऐसी सड़क का कोई औचित्य नहीं है।

घटिया सड़क मिली तो एजेंसी होगी ब्लैकलिस्ट

गुणवत्ता के मुद्दे पर मंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि निर्माण में किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं होगा। घटिया निर्माण करने वाली एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही यह भी निगरानी रखी जाए कि ब्लैकलिस्ट ठेकेदार किसी दूसरे या रिश्तेदार के नाम से नई कंपनी बनाकर दोबारा काम हासिल न कर सके। अधिकारियों को फील्ड में जाकर औचक निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए।

गुणवत्ता में राजस्थान भी अग्रणी

चौहान ने गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान को सड़क गुणवत्ता के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल किया। रखरखाव के मामले में भी राजस्थान के साथ पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के काम की सराहना की गई। उत्तर प्रदेश की एफडीआर तकनीक और असम की क्यूआर कोडिंग व्यवस्था को भी उल्लेखनीय नवाचार बताया गया।

अच्छे काम पर अगली मंजूरी में वेटेज

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो राज्य समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ काम पूरा करेंगे, उन्हें आगामी परियोजनाओं की मंजूरी में वरीयता और अतिरिक्त वेटेज दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को विशेष समारोह में सम्मानित भी किया जाएगा। वहीं खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों को अपनी कार्यशैली में सुधार करना होगा।

पांच साल की गारंटी से आगे सोचें राज्य

चौहान ने कहा कि सड़क निर्माण के बाद पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होती है। शुरुआती स्तर पर छोटे गड्ढों की मरम्मत कर सड़क की उम्र बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने राज्यों से पांच वर्ष की गारंटी अवधि समाप्त होने के बाद भी सड़कों के रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने इसे केवल निर्माण नहीं बल्कि ‘लाइफ साइकिल मैनेजमेंट’ की सोच बताया।

पीएम जनमन क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर काम

पीएम जनमन योजना के तहत छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, झारखंड और आंध्र प्रदेश के दूरदराज एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण को युद्ध स्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। चौहान ने कहा कि इन क्षेत्रों में सड़क पहुंचाना केवल विकास का काम नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व है। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल सहित सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पीएमजीएसवाई सचिव, मुख्य अभियंता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


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