रबी सम्मेलन: डेटा आधारित रणनीति और जमीनी निगरानी पर जोर 

नई दिल्ली 29-Sep-2026 01:49 PM

रबी सम्मेलन: डेटा आधारित रणनीति और जमीनी निगरानी पर जोर 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य, अनिश्चित बारिश और जल संकट के बीच रबी फसलों की तैयारी के लिए राज्यों को वैज्ञानिक योजना और डेटा आधारित रणनीति अपनानी होगी। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा साझेदारी जरूरी है। उन्होंने राज्यों से उपलब्ध जल संसाधनों का आकलन कर उसी के अनुरूप फसल चयन और सिंचाई प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।

चौहान दिल्ली स्थित पूसा के के. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026’ का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रबी सीजन की तैयारियों में जल बजट को सबसे महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। प्रत्येक राज्य और जिले को उपलब्ध सिंचाई जल का आकलन कर यह तय करना होगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल उपयुक्त रहेगी। जिन इलाकों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां दलहन और तिलहन जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

जल उपलब्धता के अनुसार तैयार करें फसल योजना

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस वर्ष बारिश औसत से कम हुई है, हालांकि फिलहाल समग्र स्तर पर जल उपलब्धता पर गंभीर असर नहीं पड़ा है। इसके बावजूद कुछ राज्यों में पानी की कमी चिंता का विषय है। ऐसे में राज्यों को मिट्टी में मौजूद नमी, उपलब्ध जल संसाधनों और सिंचाई की संभावनाओं का समय रहते आकलन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रबी बुवाई का समय नजदीक है, इसलिए तैयारियों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। सिंचाई प्रबंधन की अग्रिम योजना से फसलों को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने पुराने और परंपरागत तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय आंकड़ों के आधार पर कृषि योजना तैयार करने की जरूरत बताई। साथ ही कृषि विभागों को योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने और जमीनी स्तर पर वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने पर जोर दिया।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे का होगा आकलन

शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से में सूखे का प्रभाव है और राज्य सरकार ने सूखा घोषित किया है। कर्नाटक में भी सूखे की स्थिति बनी हुई है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीम कर्नाटक में जाकर जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करेगी। महाराष्ट्र में भी केंद्रीय टीम भेजी जाएगी। इसके अलावा वे स्वयं भी दोनों राज्यों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार संकट की इस घड़ी में किसानों के साथ खड़ी है।

कृषि और डिजिटल तकनीक पर मंथन

दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और फसल विविधीकरण, स्थिरता एवं जलवायु अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि, बुनियादी ढांचे, वित्तपोषण तथा जोखिम प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समूह चर्चाएं आयोजित की गई हैं। इन चर्चाओं के माध्यम से रबी सीजन की तैयारियों, उत्पादन बढ़ाने और किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान के लिए कार्ययोजना पर विचार किया जाएगा।

सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारक मौजूद रहे।


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